Home » झारखंड में NHM के 15.5 हजार कर्मियों और 42.5 हजार सहियाओं का मानदेय अटका, ‘डिजिटल सिस्टम’ हुआ फेल
झारखंड में ‘डिजिटल सिस्टम’ की भेंट चढ़ा 58 हजार स्वास्थ्य कर्मियों का मानदेय: खजाने में पैसा होने के बाद भी सहिया और NHM कर्मी बेहाल; 5 महीने से भुगतान ठप!
‘SNA SPARSH’ और ‘ई-वाउचर’ प्रणाली धरातल पर पूरी तरह चरमराई, DDO लॉगिन से डेटा गायब; भुखमरी की कगार पर पहुंचे अनुबंध कर्मचारी, जानिए पूरा तकनीकी पेच
रांची, 16 जून 2026:
झारखंड की चरमराती ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को अपने कंधों पर संभालने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के हजारों अनुबंध कर्मियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाली स्वास्थ्य सहियाओं के सामने इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सूबे में सरकारी दावों के उलट, फंड उपलब्ध होने और जिलों को राशि ट्रांसफर किए जाने के बावजूद तकनीकी गड़बड़ियों के कारण पिछले कई महीनों से कर्मियों को मानदेय (Salary/Honorarium) नहीं मिल सका है।
इस व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा राज्य के करीब 15,500 एनएचएम कर्मी और 42,500 स्वास्थ्य सहियाएं भुगत रही हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि राज्य स्तर के कर्मियों को पिछले तीन महीने से और जिला स्तर पर तैनात कर्मियों को चार से पांच महीनों से मानदेय या प्रोत्साहन राशि का एक भी रुपया नसीब नहीं हुआ है।
📊 झारखंड NHM मानदेय संकट: आंकड़े और तकनीकी पेच
सरकारी खजाने में राशि होने के बावजूद 58 हजार परिवारों के चूल्हे क्यों ठंडे पड़े हैं, इसका पूरा विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
प्रभावित वर्ग / प्रणाली
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कुल संख्या / प्रभावित अवधि
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मुख्य तकनीकी कारण (System Failure)
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NHM अनुबंध कर्मी
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~15.5 हजार कर्मी (3 से 5 महीने से मानदेय ठप)
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वित्त विभाग का नया ‘ई-साइन पेपरलेस’ आदेश।
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स्वास्थ्य सहिया
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~42.5 हजार सहियाएं (4 से 5 महीने से राशि बकाया)
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आधार बेस्ड DBT भुगतान प्रणाली का सुचारू रूप से कार्य न करना।
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विफल डिजिटल प्लेटफॉर्म
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एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) और ई-वाउचर
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PFMS (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) से डेटा फेच न होना।
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DDO लॉगिन एरर
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ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (DDO)
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अधिकारियों के लॉगिन पोर्टल पर कर्मियों का डेटा प्रदर्शित नहीं हो रहा।
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🛑 क्यों फेल हुआ सरकार का ‘कागज मुक्त’ (Paperless) भुगतान का दावा?
दरअसल, झारखंड सरकार के वित्त विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की गई थी। इसके तहत एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) से आच्छादित सभी बिलों का भुगतान अनिवार्य रूप से ई-साइन (e-Sign) के माध्यम से डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया से होना तय हुआ था।
लेकिन धरातल पर यह महत्वाकांक्षी डिजिटल सिस्टम पूरी तरह क्रैश कर गया है। तकनीकी त्रुटियों के चलते पीएफएमएस (PFMS) से जरूरी डेटा फेच ही नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण आज की तारीख तक झारखंड के किसी भी जिले से एक भी बिल पारित (Pass) नहीं कराया जा सका है।
💸 जून में मिल चुका है बजट, फिर भी हाथ खाली
इससे पहले मार्च महीने में बजट आवंटन की प्रक्रिया में देरी होने के कारण भुगतान बाधित हुआ था। हालांकि, बाद में 1 जून 2026 को नया बजट आवंटन प्राप्त हुआ और राज्य मुख्यालय से सभी जिलों को राशि भी भेज दी गई। भुगतान की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एनएचएम के निदेशक वित्त ने हाल ही में सभी जिलों के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक भी की है, लेकिन तकनीकी पेच जस का तस फंसा हुआ है।
💡 क्या है इस गंभीर संकट का एकमात्र तात्कालिक समाधान?
प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि इस गंभीर मानवीय संकट से निपटने का अब केवल एक ही रास्ता बचा है:
जब तक ‘एसएनए स्पर्श’ और पीएफएमएस की तकनीकी खामियां पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं, तब तक मैन्युअल बिल (Manual Bills) बनाने की छूट दी जाए।
इन मैन्युअल बिलों को सीधे ट्रेजरी (खजाने) भेजकर तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
हालांकि, इस वैकल्पिक व्यवस्था को लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष स्तर (उच्च अधिकारियों या कैबिनेट) से विशेष अनुमोदन (Special Approval) की तत्काल आवश्यकता होगी। यदि समय रहते यह फैसला नहीं लिया गया, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।