Home » रामगढ़ के उपेंद्र पांडेय ने शुरू किया ‘सेल्फी विद झोला’ अभियान, राज्यपाल ने थपथपाई पीठ; बांट चुके हैं 45,000 थैले
पॉलिथीन के खिलाफ रामगढ़ की लाडली मुहिम: राज्यपाल से मिले ‘सेल्फी विद झोला’ अभियान के प्रणेता उपेंद्र पांडेय; 3 साल में बांट दिए 45,000 कपड़े के थैले
स्कूली बच्चों और शिक्षकों को बना रहे पर्यावरण का सिपाही; लोक भवन रांची में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सराहना करते हुए कहा— “हरित भविष्य के लिए जनभागीदारी जरूरी”
रांची, 16 जून 2026:
झारखंड को प्लास्टिक और पॉलिथीन के अभिशाप से मुक्त कराने के लिए जमीनी स्तर पर चल रही एक अनोखी मुहिम आज राजभवन की दहलीज तक जा पहुंची। लोक भवन, रांची में आज माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार से रामगढ़ निवासी प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता श्री उपेंद्र पांडेय एवं उनके शिष्टमंडल के सदस्यों ने शिष्टाचार भेंट की।
इस मुलाकात के दौरान शिष्टमंडल ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक के खिलाफ चलाए जा रहे अपने बेहद लोकप्रिय ‘पॉलिथीन मुक्त अभियान’ और ‘सेल्फी विद झोला’ जैसी अनूठी जन-जागरूकता पहलों की विस्तृत रिपोर्ट महामहिम के समक्ष प्रस्तुत की।
📊 ‘पॉलिथीन मुक्त अभियान’ के मुख्य आंकड़े और प्रभाव: एक नजर में
रामगढ़ से शुरू होकर पूरे क्षेत्र में मिसाल बन चुके इस अभियान की अब तक की उपलब्धियां नीचे तालिका में दी गई हैं:
मुख्य बिंदु / अभियान
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जमीन पर दिखा असर और रणनीतिक कार्य
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मुख्य प्रणेता
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श्री उपेंद्र पांडेय (निवासी- रामगढ़, झारखंड)
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फ्लैगशिप कैंपेन
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‘सेल्फी विद झोला’ (कपड़े और पर्यावरण-अनुकूल थैलों का उपयोग)
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3 साल का रिपोर्ट कार्ड
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अब तक लगभग 45,000 कपड़े के झोलों का निर्माण और मुफ्त वितरण।
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अवेयरनेस का तरीका
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विभिन्न विद्यालयों में जाकर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जागरूक करना।
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मुख्य उद्देश्य
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एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-use Plastic) को रोकना और पौधारोपण बढ़ाना।
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🛍️ सोशल मीडिया और जमीन पर सुपरहिट है ‘सेल्फी विद झोला’ अभियान
मुलाकात के दौरान उपेंद्र पांडेय ने राज्यपाल को अवगत कराया कि पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की रणनीति पर काम किया है। इसके तहत ‘सेल्फी विद झोला’ अभियान चलाया जा रहा है, जो युवाओं और आम लोगों को बाजार जाते समय कपड़े का झोला साथ ले जाने के लिए प्रेरित करता है।
यह शिष्टमंडल न केवल लोगों से पॉलिथीन छोड़ने का आग्रह करता है, बल्कि उन्हें पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पौधारोपण (Tree Plantation) करने की शपथ भी दिलाता है।
🏫 स्कूलों में बच्चों को दी जा रही है प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
शिष्टमंडल ने राज्यपाल को बताया कि वे लगातार विभिन्न सरकारी और निजी विद्यालयों का दौरा कर रहे हैं। वहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को उनके रोजमर्रा के जीवन के साथ-साथ स्कूली प्रोजेक्ट और परियोजना कार्यों (Project Works) में भी प्लास्टिक फाइलों के बजाय पर्यावरण-अनुकूल झोलों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक बन सके।
💬 “स्वच्छ और हरित पर्यावरण के लिए समाज का आगे आना जरूरी” — राज्यपाल
शिष्टमंडल के सेवा भाव और पिछले तीन वर्षों में 45 हजार झोलों के वितरण के विशाल आंकड़े को देखकर राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा:
“एक स्वच्छ, सुंदर और हरित पर्यावरण के निर्माण के लिए केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि इसमें व्यापक जनभागीदारी (Public Participation) का होना अत्यंत आवश्यक है। उपेंद्र पांडेय और उनकी टीम द्वारा किया जा रहा यह कार्य समाज के हर नागरिक के लिए प्रेरणादायी है। जब तक आम आदमी कपड़े के झोले को अपनी शान नहीं बनाएगा, तब तक हम प्लास्टिक मुक्त समाज की कल्पना नहीं कर सकते।”