Home » झारखंड में वनों का बनेगा 1 महीने में डिजिटल रिकॉर्ड, CM हेमंत सोरेन ने दिए सख्त निर्देश !
झारखंड में 1 महीने के भीतर तैयार होगा वनों का डिजिटल रिकॉर्ड, CM हेमंत सोरेन ने वन विभाग की समीक्षा में दिए बड़े निर्देश !
रांची : झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, वन्यप्राणियों और समृद्ध जैव विविधता से है। इसे और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में ‘वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग’ के अद्यतन कार्यों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों (DFOs) से ऑनलाइन जुड़कर सीधे संवाद किया और काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि राज्य में अधिकाधिक पौधरोपण कर हरियाली लाने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन और सतत विकास के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
📍 बैठक के 6 मुख्य बिंदु (Key Highlights):
डिजिटल रिकॉर्ड: राज्य गठन (साल 2000) से अब तक के सभी वन क्षेत्रों का टेक्निकल और डिजिटल रिकॉर्ड 1 महीने के भीतर तैयार होगा।
लोकल इको-सिस्टम: पौधरोपण सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीणों की आजीविका के अनुकूल होगा।
व्यावसायिक खेती: काजू और बांस (बैम्बू) की खेती के लिए बड़े भू-भागों की पहचान कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।
मुफ्त बिजली योजना: “एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं” योजना का शहरों में प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
वन पट्टा: वन पट्टा के लंबित (Pending) मामलों का शीघ्र निष्पादन राज्य सरकार की प्राथमिकता होगी।
इको-टूरिज्म: वन विभाग और पर्यटन विभाग मिलकर झारखंड में इको-टूरिज्म के विकास को रफ्तार देंगे।
🌳 एक क्लिक पर दिखेगा पूरा जंगल: बनेगा डिजिटल मैप
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे एक क्लिक पर पूरे राज्य के वन क्षेत्रों का वास्तविक स्वरूप, संरचना और वर्तमान स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सके। इसके लिए वन क्षेत्रों के डिजिटल मैप की लेयरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
“राज्य निर्माण के बाद वनों का विस्तार भी हुआ है और कहीं-कहीं कटाई व माइनिंग से बदलाव भी आए हैं। ऐसे में वनों का अद्यतन (Updated) और वैज्ञानिक डिजिटल दस्तावेज तैयार करना समय की मांग है।”
— श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री
वन क्षेत्रों के तेजी से विकास के लिए मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर के माध्यम से हवाई बीज छिड़काव (Aerial Seeding) करने के लिए एक बेहतर कार्य योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, जंगली हाथियों के हमले से प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि और फसल/मकान के नुकसान का भुगतान तुरंत करने को कहा गया है।
💡 “एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं” योजना पर जोर
पर्यावरण संरक्षण को शहरी विकास से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों को बचाने के लिए व्यवस्थित शहरी पौधरोपण अभियान चलाया जाए। इसके तहत अकाशिया सहित अन्य छायादार और प्रदूषण कम करने वाले पेड़ बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ” का प्रभावी प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में एक पेड़ लगाने पर 5 यूनिट बिजली निशुल्क दी जाती है।
🌾 महुआ, पलाश और काजू-बांस से चमकेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने अनुपयोगी वृक्ष लगाने की परंपरा को खारिज करते हुए कहा कि पौधरोपण हमेशा उपयोगिता आधारित होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निम्नलिखित वृक्षों के बड़े पैमाने पर रोपण का निर्देश दिया:
आजीविका और पोषण के लिए: महुआ, जामुन, कटहल, आंवला, चिरौंजी, करंज और बेर।
लाह और तसर उद्योग के लिए: पलाश, कुसुम और अर्जुन के वृक्ष।
व्यावसायिक खेती (Cashew & Bamboo Farming): बड़े भू-भागों की पहचान कर काजू और बांस के पौधे लगाए जाएंगे। बांस आधारित उद्योगों और ‘बैम्बू क्राफ्ट’ को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।
⚠️ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले मामलों में प्रभावी और त्वरित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्रदूषण संबंधी मामलों के पारदर्शी और तेज निपटारे के लिए ‘जनविश्वास ऐप’ (Janvishwas App) के प्रभावी संचालन पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में कौन-कौन रहे उपस्थित ?
इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, वन विभाग के सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी पी०, कल्याण विभाग के सचिव श्री कृपानंद झा, PCCF (HoFF) श्री संजीव कुमार, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ श्री रवि रंजन व श्री एस०आर० नटेश सहित वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।