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झारखंड युवा कांग्रेस में आधी रात को बड़ा बवाल: प्रदेश अध्यक्ष पर नशे में गाली-गलौज का आरोप, महासचिव आयुष अग्रवाल ने खोला मोर्चा
रांची/ धनबाद (सर्किट हाउस): झारखंड युवा कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर पर एक बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण विवाद सामने आया है। चुनाव के माध्यम से निर्वाचित होकर आए प्रदेश महासचिव आयुष अग्रवाल ने वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पर शराब के प्रभाव में आकर गाली-गलौज करने और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ घोर अभद्र व्यवहार करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
🚨 आधी रात को सर्किट हाउस में क्या हुआ?
महासचिव आयुष अग्रवाल के अनुसार, यह घटना देर रात लगभग 1:30 बजे सर्किट हाउस में घटी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष अत्यधिक शराब के नशे में वहाँ पहुँचे और 15-20 लोगों की मौजूदगी में उनके साथ सार्वजनिक रूप से माँ-बहन की गालियाँ देते हुए बेहद अमर्यादित व्यवहार किया।
बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी; आरोप है कि प्रदेश अध्यक्ष ने वहाँ मौजूद अन्य वरिष्ठ नेताओं—नवनीत मैडम (प्रदेश प्रभारी), मुरारी भैया और फहद भाई (प्रदेश सह-प्रभारी) के साथ भी घोर असम्मानजनक व्यवहार किया। पीड़ित पदाधिकारियों में दो राष्ट्रीय सचिव और दो निर्वाचित प्रदेश महासचिव शामिल हैं।
🔥 “हम किसी के रहमो-करम पर नहीं बने महासचिव”
अपने आत्मसम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात रखते हुए आयुष अग्रवाल ने तीखे शब्दों में कहा:
”हम प्रदेश महासचिव किसी की कृपा या रहमो-करम से नहीं बने हैं। हमने जमीन पर रात-दिन मेहनत की है, चुनाव लड़ा है और कार्यकर्ताओं के भारी समर्थन से निर्वाचित होकर इस जिम्मेदारी तक पहुँचे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश अध्यक्ष हमें संगठन के सम्मानित पदाधिकारियों के बजाय अपने ‘कॉर्पोरेट कर्मचारी’ की तरह समझते हैं।”
🛑 महिला पदाधिकारियों के सम्मान और मर्यादा का उल्लंघन
आयुष अग्रवाल ने इस घटना को न केवल व्यक्तिगत अपमान बल्कि पूरे संगठन की गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने महिला सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश प्रभारी नवनीत मैडम जैसी महिला पदाधिकारी के साथ इस प्रकार का बर्ताव पूरी तरह से निंदनीय है, जिसने सम्मान और मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर दिया है।
❓ संगठन के सामने खड़ा हुआ बड़ा सवाल
इस अभूतपूर्व सांगठनिक संकट के बाद आयुष अग्रवाल ने कांग्रेस परिवार और अपने साथी कार्यकर्ताओं से सीधे तौर पर न्याय की अपील की है। उन्होंने सवाल उठाया:
”आज की इस शर्मनाक घटना के बाद मैं जानना चाहता हूँ कि संगठन में लोकतांत्रिक मूल्यों, कार्यकर्ताओं के सम्मान और निर्वाचित पदाधिकारियों की गरिमा के साथ कौन खड़ा है? जो साथी इस प्रकार के तानाशाही और अमर्यादित व्यवहार का समर्थन करते हैं या जो इसके विरोध में हैं, वे खुलकर अपनी बात सामने रखें।”
यह विवाद अब झारखंड कांग्रेस के भीतर एक बड़ी राजनीतिक चिंगारी बन चुका है। अब देखना यह है कि केंद्रीय नेतृत्व इस गंभीर अनुशासनहीनता और मर्यादा के उल्लंघन पर क्या संज्ञान लेता है।