Home » JPSC 11वीं-13वीं व फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती रद्द करने के आदेश पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार और JPSC से मांगा जवाब
राँची- झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर स्टे, सरकार और आयोग को नोटिस !
हाईलाइट्स
अदालत का रुख: न्यायमूर्ति दीपक रौशन की पीठ ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगाई।
मांगा जवाब: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं की दलील: “दूसरी नौकरी छोड़कर ट्रेनिंग ली, अचानक 18 अगस्त के नोटिफिकेशन से सेवा समाप्त करना न्यायसंगत नहीं।”
रांची: झारखंड सरकार द्वारा हाल ही में नोटिफिकेशन जारी कर नियुक्त कर्मियों को हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की कोर्ट ने जेपीएससी (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर (विज्ञापन संख्या 18/2023) की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और जेपीएससी से इस संबंध में जवाब तलब किया है।
कोर्ट में प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने मजबूती से पक्ष रखा।
तीन अलग-अलग याचिकाओं में सरकार के आदेश को चुनौती
मामले में दायर दो अलग-अलग याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य के अलावा सोनम कुमारी ने सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके जरिए 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (विज्ञापन संख्या 1/2024) को रद्द करने का आदेश दिया गया था। वहीं, तीसरी याचिका में सौरव सिंह व अन्य ने जेपीएससी द्वारा आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति (विज्ञापन संख्या 18/2023) को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी है।
‘दूसरी नौकरी छोड़कर आई थी, ट्रेनिंग के बाद अचानक निकाल दिया’
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने किसी दूसरे स्थान पर चल रही अपनी पुरानी नौकरी को छोड़कर झारखंड में पदभार ग्रहण किया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को बकायदा नियुक्ति पत्र सौंपा गया था और उन्होंने अपनी विभागीय ट्रेनिंग भी सफलता पूर्वक पूरी की।
इसी बीच राज्य सरकार ने अचानक 18 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी कर उनकी और अन्य नवनियुक्त कर्मियों की सेवा रद्द कर दी। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि सरकार के इस असंवैधानिक और मनमाने आदेश को अविलंब निरस्त किया जाए।
हाईकोर्ट के इस अंतरिम स्टे के बाद अब प्रभावित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं सरकार और JPSC के जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।