Home » राँची में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार हुआ दंपती: ATS अफसर बन ठगों ने ऐंठे 3.40 लाख, बम ब्लास्ट का दिखाया डर
राँची में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफनाक मामला: ATS अफसर बनकर दंपती से 3.40 लाख की ठगी, दिल्ली बम ब्लास्ट से जोड़ा कनेक्शन
राँची: राजधानी में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। साइबर ठगों ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल बुनकर एक दंपती को अपना शिकार बनाया और उनसे 3.40 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित अतुल कुमार की शिकायत पर राँची के साइबर क्राइम थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
ऐसे बनाया मानसिक दबाव का शिकार
पीड़ित दंपती के मुताबिक, जालसाजों ने खुद को एटीएस (ATS – एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर कॉल किया। ठगों ने दंपती पर दबाव बनाते हुए दावा किया कि उनका मोबाइल नंबर दिल्ली में हुए एक बम ब्लास्ट से जुड़े संदिग्ध डॉक्टर के संपर्क में पाया गया है। इस झूठे आरोप और लगातार आ रहे कॉल से दंपती गहरे मानसिक तनाव में आ गए।
डिजिटल अरेस्ट का तरीका:
नकली यूनिफॉर्म का इस्तेमाल: वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन पर कई लोग पुलिस की वर्दी में नजर आए, जिससे दंपती को लगा कि वे सचमुच किसी राष्ट्रीय सुरक्षा जांच का सामना कर रहे हैं।
लगातार निगरानी: कॉल के दौरान दंपती को स्क्रीन से हटने या किसी से बात करने की इजाजत नहीं दी गई।
ब्लैकमेलिंग और वसूली: केस से नाम हटाने और गिरफ्तारी से बचने के बहाने अलग-अलग किस्तों में करीब 3.40 लाख रुपये अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में क्या करें? (सुरक्षा टिप्स)
सरकारी एजेंसियां कभी वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करतीं: पुलिस, सीबीआई, ईडी या एटीएस कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप वीडियो कॉल पर पूछताछ या अरेस्ट नहीं करती।
डरें नहीं, तुरंत सत्यापन करें: किसी भी अनजान कॉल पर गंभीर आरोप लगने पर घबराएं नहीं। कॉल काटकर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर जानकारी दें।
पैसे ट्रांसफर न करें: कोई भी असली जांच एजेंसी केस खत्म करने के नाम पर खाते में पैसे जमा करने को नहीं कहती।
हेल्पलाइन नंबर: साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 (राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।