Home » झारखंड में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा हमलावर: दीनदयाल बरनवाल ने उठाए गंभीर सवाल, सार्वजनिक ऑडिट की मांग
घोषणाएं नहीं, ज़मीन पर इलाज चाहिए: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा का तीखा प्रहार !
रांची: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बरनवाल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) तक, मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए भारी संकट झेलना पड़ रहा है। सरकार केवल कागजी घोषणाएं कर रही है, जबकि धरातल पर मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
1. कीचड़ में खटिया पर मरीज और ठप पड़ी 108 एंबुलेंस सेवा
दीनदयाल बरनवाल ने गिरिडीह के देवरी की हालिया घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि रास्ते में कीचड़ होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में ग्रामीणों को एक किलोमीटर तक मरीज को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यभर में 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह वेंटिलेटर पर है:
समीक्षा बैठकों में कई एंबुलेंस के खराब पड़े होने की पुष्टि हुई है।
चालू वाहनों में भी ऑक्सीजन सिलेंडर और जीवनरक्षक उपकरणों का अभाव है।
प्रचार-प्रसार के साथ शुरू की गई ‘बाइक एंबुलेंस’ योजना केवल कागजों और कमीशनखोरी तक सीमित रह गई है।
“जहाँ बड़े वाहन नहीं पहुँच सकते, वहाँ बाइक एंबुलेंस पहुँचाने का दावा किया गया था। आज यह योजना हवा-हवाई हो चुकी है और सरकार सिर्फ घोटालों में उलझी है।” — दीनदयाल बरनवाल, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
2. RIMS और सदर अस्पतालों का बुरा हाल: हाईकोर्ट भी जता चुका है नाराजगी
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIMS) की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा ने कहा कि हाईकोर्ट भी इस पर कड़ी टिप्पणी कर चुका है। अदालत ने रिम्स में रिक्त पदों पर नियुक्तियों, चिकित्सा उपकरणों की खरीद में देरी और जर्जर भवनों की मरम्मत न होने पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया था।
वहीं, गोड्डा सदर अस्पताल जैसी जगहों पर जीवनरक्षक दवाओं का भारी अकाल है, जिससे गरीब मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
3. गोदामों में एक्सपायर हो रहीं दवाएं: बाबूलाल मरांडी ने उठाई जांच की मांग
स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया और प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरोप हैं कि:
सरकारी गोदामों में रखी जीवनरक्षक दवाएं बिना बांटे ही एक्सपायर हो रही हैं।
एंबुलेंस खरीद और रख-रखाव में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।
दवाओं की किल्लत और समय पर इलाज न मिलने से कई मरीज दम तोड़ चुके हैं।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि जब तक दवाओं की बर्बादी और एंबुलेंस खरीद की स्वतंत्र जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक जवाबदेही तय नहीं हो सकती।
4. भाजपा की मुख्य मांगें: सार्वजनिक ऑडिट कराए सरकार
भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों और घोषणाओं का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा है। पार्टी ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
एंबुलेंस सेवा का जिला-वार ऑडिट: हर जिले में उपलब्ध एंबुलेंस, उनके चालू होने की स्थिति और उनमें उपलब्ध ऑक्सीजन/उपकरणों की जांच का डेटा सार्वजनिक किया जाए।
दवा उपलब्धता का ब्योरा: RIMS समेत सभी सदर अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट जारी हो।
खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच: दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हुई वित्तीय गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
भाजपा प्रवक्ता ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि किसी भी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था का असली आकलन उसकी घोषणाओं से नहीं, बल्कि आपात स्थिति में एक गरीब मरीज को मिलने वाले तुरंत इलाज से होता है—और इस पैमाने पर झारखंड सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।