Home » खान संशोधन विधेयक पर भड़कीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, बोलीं– ‘खनिज पर राज्यों का अधिकार कमजोर करना झारखंड पर हमला’
मुख्य बिंदु:
केंद्र के नए खनन एवं खनिज संशोधन विधेयक पर झारखंड की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जताया कड़ा विरोध।
कहा– खनिज संपदा झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़, राजस्व पर अंकुश राज्यवासियों पर सीधा प्रहार।
राजस्व प्रभावित होने से मंईयां सम्मान योजना, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाएं होंगी प्रभावित।
“जल, जंगल, जमीन और खनिज पर कोई समझौता नहीं, लोकतांत्रिक तरीके से करेंगे विरोध।”
खनिज संपदा पर राज्यों के अधिकार कमजोर करना झारखंड के हितों पर सीधा प्रहार : शिल्पी नेहा तिर्की !
रांची : लोकसभा में हाल ही में पारित खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र पर राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों को लगातार कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया।
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खनिज संपदा झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में राज्य के खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर किसी भी प्रकार का अंकुश लगाना, झारखंड के आर्थिक हितों और करोड़ों राज्यवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है।
“देश को खनिज देते हैं, लेकिन हमारे अधिकारों पर ही अंकुश”
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा:
“झारखंड की धरती पूरे देश को खनिज देती है। देश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में हमारा बड़ा योगदान है। ऐसे में उस खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व पर राज्य का अधिकार कमजोर किया जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।”
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा पर पहला अधिकार और उससे जुड़े आर्थिक हितों की सुरक्षा करना झारखंड की जनता का संवैधानिक एवं नैतिक अधिकार है।
विकास योजनाओं और जनहित पर पड़ेगा सीधा असर
मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त राजस्व का उपयोग सरकार गरीब, किसान, युवा, महिला और आम नागरिकों के कल्याण के लिए करती है।
प्रभावित होने वाली प्रमुख योजनाएं:
मंईयां सम्मान योजना
छात्रवृत्ति एवं शिक्षा योजनाएं
स्वास्थ्य सेवाएं और अस्पताल
ग्रामीण विकास एवं सड़कें
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य के राजस्व स्रोतों को सीमित किया गया, तो इसका सीधा असर राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम जनता के विकास पर पड़ेगा।
विधेयक पर तत्काल पुनर्विचार की मांग
मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस विधेयक के प्रावधानों पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए। राज्यों के वित्तीय अधिकारों और राजस्व हितों को नुकसान पहुंचाने वाले सभी प्रावधानों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
“जल, जंगल, जमीन और खनिज पर समझौता नहीं”
अपने रुख को और कड़ा करते हुए शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा:
“झारखंड अपने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा। यह लड़ाई केवल किसी सरकार या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि झारखंड की जनता के भविष्य की लड़ाई है।”