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परिसीमन का विरोध राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित, जनता को भ्रमित करने का प्रयास: मृत्युंजय शर्मा
‘संवैधानिक प्रक्रिया पर भ्रम फैला रहा विपक्ष, जनगणना के आंकड़े आने का तो इंतजार करें’ — भाजपा
रांची :भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने देश में परिसीमन (Delimitation) को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। परिसीमन कोई राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि संविधान द्वारा निर्धारित एक आवश्यक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights)
संवैधानिक अनिवार्यता: संविधान की भावना के अनुसार हर जनगणना के बाद परिसीमन होना चाहिए ताकि प्रतिनिधित्व संतुलित रहे।
मतदाताओं की असमानता: जनसंख्या वृद्धि की दर अलग-अलग होने से संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या का संतुलन बिगड़ गया है।
पहले ही हो चुकी है देरी: राष्ट्रीय हित की यह प्रक्रिया पहले ही दो बार 25-25 वर्षों के लिए स्थगित की जा चुकी है।
काल्पनिक आशंकाएं: अभी जनगणना पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष बिना आंकड़ों के ही राजनीति चमकाने में जुट गया है।
“परिसीमन किसी राज्य, क्षेत्र या समुदाय के विरुद्ध नहीं है। यह पूरे देश में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित, न्यायसंगत और पारदर्शी बनाने की एक संवैधानिक व्यवस्था है।” — मृत्युंजय शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता (भाजपा)
समान प्रतिनिधित्व के लिए क्यों जरूरी है परिसीमन?
मृत्युंजय शर्मा ने विस्तार से बताया कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि की दर अलग-अलग रही है। इसके कारण अनेक संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता उत्पन्न हो गई है।
ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत “एक नागरिक, एक वोट, एक मूल्य” के अनुरूप नहीं है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से प्रत्येक नागरिक के मत का मूल्य अधिक समान और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व अधिक न्यायसंगत हो सकेगा।
आंकड़ों से पहले राजनीति करना गैर-जिम्मेदाराना
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने विपक्ष के रवैये पर आश्चर्य जताते हुए कहा:
अभी देश की जनगणना (Census) की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है।
इसके आधिकारिक आंकड़े भी सामने नहीं आए हैं।
इसके बावजूद कुछ दल काल्पनिक आशंकाएं खड़ी कर जनता के बीच डर का माहौल बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है।
भाजपा की अपील: अफवाहों से सावधान रहें
भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मत है कि संवैधानिक संस्थाओं और संविधान सम्मत प्रक्रियाओं का सम्मान होना चाहिए। परिसीमन पर सार्थक चर्चा जनगणना के आधिकारिक आंकड़े आने के बाद तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि अफवाहों और राजनीतिक स्वार्थ के आधार पर। भाजपा ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे भ्रामक प्रचार से सावधान रहें और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अपना विश्वास बनाए रखें।
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