Home » परिसीमन से आदिवासी सीटें घटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं: शिल्पी नेहा तिर्की | 30 अगस्त को मोरहाबादी में महाजुटान
परिसीमन के नाम पर आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी में कटौती बर्दाश्त नहीं : शिल्पी नेहा तिर्की !
रांची: मांडर विधानसभा क्षेत्र की विधायक और कांग्रेस नेत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समाज अपने संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह गोलबंद है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के नाम पर राज्य में आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और आरक्षित सीटों में किसी भी तरह की कटौती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दो प्रमुख आयोजनों को लेकर बनाई गई रणनीति
विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने मांडर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस पार्टी पदाधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्य रूप से दो बड़े आयोजनों की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई:
27 अगस्त: चंदा चोरी और ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ के विरोध में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में जोरदार धरना-प्रदर्शन।
30 अगस्त: रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’।
पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने के निर्देश
बैठक के दौरान शिल्पी नेहा तिर्की ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करें। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति पर जोर दिया, ताकि दोनों कार्यक्रमों को ऐतिहासिक बनाया जा सके।
“जल-जंगल-जमीन और पहचान से कोई समझौता नहीं”
बैठक को संबोधित करते हुए शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा:
“आदिवासी समाज केवल अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ रहा है, बल्कि अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी, संवैधानिक अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए मैदान में है। लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व ही अधिकारों की सबसे मजबूत आवाज है। झारखंड की पहचान, जल-जंगल-जमीन और यहां के आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा। प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब दिया जाएगा।”