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📰 ट्रेजरी घोटाले में अपने चहेते अफसरों को बचा रही झारखंड सरकार: प्रतुल शाहदेव !
💥 ‘घोटालों की लीपापोती करने के लिए CID बनी एजेंसी ऑफ चॉइस’ — BJP प्रवक्ता का बड़ा हमला !
रांची: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड सरकार पर राज्य के इतिहास के सबसे बड़े ट्रेजरी घोटालों (झारखंड कोषागार घोटाला) में अपने चहेते अधिकारियों को नियम विरुद्ध बचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रतुल शाहदेव ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के लगभग ₹10,000 करोड़ के सरकारी धन का कोई हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है।
🔍 SIT गठन पर उठाए सवाल: निष्पक्ष जांच की गुंजाइश नहीं
बीजेपी प्रवक्ता ने जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा:
हितों का टकराव (Conflict of Interest): SIT में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो घोटाला अवधि के दौरान हजारीबाग और बोकारो में SP रह चुके हैं—जहाँ पहले ही घोटाले की चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
छोटी मछलियों पर गाज: सरकार केवल छोटे कर्मचारियों और सिपाहियों को पकड़कर बड़े अधिकारियों को गलत तरीके से बचाने और फायदा पहुँचाने का काम कर रही है।
चारा घोटाले की याद दिलाई: चारा घोटाले में भी सीबीआई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने ट्रेजरी अफसरों की भूमिका को दोषी माना था, लेकिन वर्तमान सरकार इतिहास से सबक नहीं ले रही।
💬 “झारखंड में जिस किसी घोटाले की लीपापोती करनी होती है या जिसे ठंडे बस्ते में डालना होता है, उसकी जाँच का जिम्मा CID को सौंप दिया जाता है।”
— प्रतुल शाहदेव, मुख्य प्रवक्ता (BJP झारखंड)
📜 वित्त नियमावली को ताक पर रखकर दी जा रही क्लीनचिट
प्रतुल शाहदेव ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि झारखंड वित्त नियमावली (Section 114, 115, 116, 305, 305A, 306) और झारखंड कोषागार संहिता 2016 (Appendix 3, 18, 19) के तहत डीडीओ (DDO) और ट्रेजरी अफसरों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय है।
जांच की जिम्मेदारी: भुगतान से पहले बिल, दस्तावेज और हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता जांचना ट्रेजरी अफसरों का मूल दायित्व है।
चहेतों को राहत: इसके बावजूद CID ने अपनी चार्जशीट में डीडीओ और ट्रेजरी अफसरों का नाम तक शामिल नहीं किया और उन्हें क्लीनचिट दे दी। चाईबासा घोटाले में भी सिर्फ सिपाहियों पर गाज गिराई गई।
🛑 PAG को ढाई महीने बाद भी नहीं सौंपे गए 87 तरह के दस्तावेज
राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये का पर्दाफाश करते हुए बीजेपी ने बताया:
सरकार ने स्पेशल ऑडिट के लिए प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (PAG) से सिफारिश की थी।
PAG ने 11 मई, 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे।
ढाई महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी सरकार ने एक भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया है।
उत्पाद सचिव के नेतृत्व में बनी SIT ने भी अभी तक अपनी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
⚠️ ‘लालू यादव जैसी गलती दोहरा रही है वर्तमान सरकार’
प्रतुल शाहदेव ने चेताया कि चारा घोटाले को रफा-दफा करने की कोशिश में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को 6 मुकदमों में सजा हुई थी। मौजूदा झारखंड सरकार भी वही ऐतिहासिक गलती दोहरा रही है।इस प्रेस वार्ता में बीजेपी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अजय राय भी मौजूद रहे।