Home » विकसित भारत के लिए विकसित झारखंड को समर्पित मोदी सरकार: अटल जी ने बनाया, मोदी ने संवारा — आदित्य साहू
झारखंड केवल एक राज्य नहीं है। यह हमारी जनजातीय पहचान, हमारे संघर्ष, हमारी संस्कृति और हमारे स्वाभिमान की सोना माटी है। नदी, पहाड़ और घने जंगलों की इस धरती ने हमेशा अपने अधिकार और सम्मान के लिए आवाज उठाई है। दशकों की उपेक्षा के बाद 15 नवंबर 2000 का वह दिन आया, जब धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला। यह श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का वह वादा था जो उन्होंने इस माटी के करोड़ों लोगों से किया था और पूरा करके दिखाया।
श्रद्धेय अटल जी की सोच साफ थी। झारखंड जैसी खनिज संपन्न और जनजातीय बहुल धरती तभी आगे बढ़ सकती है, जब यहाँ की जनता के हिसाब से शासन चले और विकास हर गाँव तक पहुँचे। अलग राज्य बनने के बाद झारखंड की जनता के मन में एक उम्मीद जगी थी कि अब उनके सपने पूरे होंगे। लेकिन जो हुआ, वह उस उम्मीद के साथ न्याय नहीं कर सका।वर्ष 2000 से 2014 तक झारखंड में सरकारें बदलती रहीं। इस दौरान नौ अलग-अलग सरकारें बनीं और तीन बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। इसका सीधा असर विकास पर पड़ा। योजनाएँ बनती थीं, लेकिन जमीन तक पहुँचने में देर होती थी। कई परियोजनाएँ फाइलों में अटकी रहीं। जो राज्य कोयले, लोहे और खनिज संपदा में देश के अग्रणी राज्यों में था, उसके गाँवों में सड़क नहीं थी। जहाँ की जमीन के नीचे अरबों का खजाना था, वहाँ के बच्चों के पास ढंग के स्कूल नहीं थे। किसान, मजदूर और आदिवासी परिवार योजनाओं की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन सरकार में अस्थिरता के चलते योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाइयाँ आती रहीं।
डबल इंजन सरकार का प्रभाव
दिसंबर 2014 में झारखंड की तस्वीर बदली। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व और राज्य में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार ने मिलकर वह किया जो पहले कभी नहीं हुआ था। रघुवर दास जी झारखंड के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने जिन्होंने पूरे पाँच साल का कार्यकाल पूरा किया। चौदह साल में नौ सरकारें देखने वाली इस माटी के लिए यह कोई छोटी बात नहीं थी। जब केंद्र और राज्य एक ही दिशा में चलते हैं तो नतीजे भी एक अलग ही स्तर पर दिखते हैं। 2014 से 2019 के बीच झारखंड के हर आम नागरिक की आय में लगभग 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पूँजीगत व्यय लगभग दोगुना हुआ, खनन राजस्व में 73 प्रतिशत और निर्यात में 130 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। लेकिन इन आँकड़ों से भी बड़ी बात यह थी कि अब योजनाएँ जमीन तक प्रभावी तरीके से पहुँच रही थीं।
हर घर- हर गाँव तक पहुँचा विकास
इस दौर में आम आदमी के जीवन में जो बदलाव आया, वह असली परिवर्तन था। अप्रैल 2019 तक 29 लाख से अधिक उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिए गए। जो माताएँ और बहनें सालों से लकड़ी के धुएँ में खाना पकाती थीं, उनके चूल्हे बदल गए। करोड़ों जन-धन खाते खुले और गरीब परिवार पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े। लाखों परिवारों को पक्का घर मिला और शौचालय बनने से महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान मिला। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को महँगे इलाज की चिंता से मुक्त किया। हजारीबाग, दुमका और पलामू में नए मेडिकल कॉलेज शुरू हुए और देवघर में राज्य के पहले एम्स की नींव पड़ी। स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में झारखंड को देश का सबसे स्वच्छ राज्य घोषित किया गया। सभी शहरी निकाय खुले में शौच से मुक्त हुए और रांची को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया।
सड़क से हवाई सफर तक
2014 से पहले झारखंड में रेलवे को मिलने वाला औसत सालाना बजट मात्र ₹457 करोड़ था। डबल इंजन सरकार के दौरान यह बढ़कर ₹2,200 करोड़ तक पहुँचा। जिस देवघर में श्रद्धालु घंटों बस का इंतज़ार करते थे, आज वहाँ हवाई अड्डा है। जो साहिबगंज कभी पिछड़ा कहलाता था, आज वह मल्टी-मॉडल टर्मिनल के जरिए राष्ट्रीय जलमार्ग नेटवर्क से जुड़ा है। धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स को आईआईटी का दर्जा मिला और व्यापार सुगमता में झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ। 2019 के बाद भी इस गति में कोई कमी नहीं आई। आज झारखंड का रेलवे बजट ₹7,306 करोड़ तक पहुँच चुका है, जो 2009-2014 के मुकाबले सोलह गुना अधिक है। राज्य के पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। रांची-हावड़ा और रांची-वाराणसी जैसे प्रमुख मार्गों पर वंदे भारत ट्रेनें दौड़ रही हैं। 57 रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। उत्तर करनपुरा में 660 मेगावाट की बिजली इकाई चालू हो चुकी है। आईआईएम रांची का नया परिसर तैयार है और जहाँ कभी केवल 180 एमबीबीएस सीटें थीं, आज 1,000 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। हमारा झारखंड अब केवल खनिजों का राज्य नहीं, ज्ञान और अवसरों की धरती भी बन रहा है।
2019 के बाद भी मोदी जी का अटल भरोसा
2019 में राज्य में सरकार बदली और डबल इंजन का एक पहिया थम गया। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खुद यह ज़िम्मेदारी उठाई कि झारखंड की जनता इस बदलाव की कीमत न चुकाए। केंद्र ने अपनी तरफ से पूरी ताकत लगाई ताकि एक इंजन की कमी आम जनता को न खले। किसान सम्मान निधि के तहत राज्य के 18 लाख 23 हजार से अधिक किसानों के खातों में सीधे ₹8,928 करोड़ पहुँचे। जल जीवन मिशन ने 31 लाख से अधिक नए नल जल कनेक्शन दिए। 2019 में जहाँ केवल साढ़े पाँच प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल का पानी था, आज यह आँकड़ा 55 प्रतिशत से अधिक है। इसका सबसे अधिक लाभ उन माताओं और बहनों को मिला जो वर्षों से दूर-दूर से पानी ढोती आई थीं। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 16 लाख से अधिक गरीब परिवारों के पक्के घर बनकर तैयार हुए। आयुष्मान भारत योजना के जरिए 29 लाख 40 हजार से अधिक लोगों का मुफ्त इलाज हुआ। मुद्रा योजना ने 1 करोड़ 57 लाख से अधिक छोटे कारोबारियों और युवा उद्यमियों को ₹81,247 करोड़ की आर्थिक मदद दी। लखपति दीदी अभियान के जरिए 4 लाख 81 हजार से अधिक महिलाएँ अब सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं। यह उस संकल्प का प्रमाण है जो मोदी जी ने लिया था कि राज्य में चाहे जो हो, झारखंड के गरीब, किसान और आदिवासी परिवार केंद्र की नज़र से कभी ओझल नहीं होंगे।
जनजातीय गौरव और सम्मान
भाजपा ने हमेशा झारखंड की जनजातीय पहचान को राजनीतिक नारे से नहीं, बल्कि नीति और नीयत से सम्मान दिया है। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। राज्य में 91 ऐसे विद्यालय स्वीकृत हुए हैं जिनमें से 51 पूरी तरह कार्यशील हैं।प्रधानमंत्री मोदी जी ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी के नाम पर प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान यानी पीएम जनमन की शुरुआत की। यह केवल एक योजना नहीं, उन जनजातीय समुदायों के लिए न्याय का संकल्प है जो आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी विकास की मुख्यधारा से दूर थे। इसी के तहत झारखंड में 35 वन धन विकास केंद्र चालू हैं जिनसे जंगल और वनोपज से जुड़े 2,876 से अधिक आदिवासी परिवारों की आजीविका मजबूत हुई है। तेंदूपत्ते पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से वनवासी समुदायों को सीधा लाभ मिला है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। यह केवल एक तारीख का सम्मान नहीं था, करोड़ों आदिवासियों की संस्कृति, संघर्ष और स्वाभिमान को राष्ट्रीय मान्यता देना था।
झारखंड को चाहिए डबल इंजन की ताकत
झारखंड के भाइयो और बहनो, पिछले दो दशकों का अनुभव साफ बताता है कि जब केंद्र और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार रही, तब हमारे झारखंड ने अपने इतिहास में सबसे तेज विकास और सबसे स्थिर शासन देखा। और जब एक इंजन कमज़ोर पड़ा, तब भी मोदी जी ने केंद्र से इतना दिया कि विकास रुकने न पाए। सोचिए, जब दोनों इंजन पूरी ताकत से चलेंगे तो यह सोना माटी कहाँ पहुँचेगी। झारखंड की जनता ऐसी सरकार चाहती है जो विकास को राजनीति से ऊपर रखे। ऐसी सरकार जो आदिवासी समाज, गरीब, किसान, महिला और युवा सबके भविष्य के लिए ईमानदारी से काम करे। भाजपा यह बात केवल कहती नहीं है, सरकार में रहकर इसे साबित भी कर चुकी है। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमारे झारखंड को अपनी पहचान दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने उसे विकास, सुविधाओं और सम्मान की नई दिशा दी। आज यह सोना माटी नए अवसरों के सामने खड़ी है। भाजपा इस धरती के हर बेटे-बेटी के साथ मिलकर झारखंड को विकास, सम्मान और समृद्धि की नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।