Home » औरंगाबाद में ₹411 करोड़ का सीवेज प्रोजेक्ट: विकास या विनाश ? लापरवाही से ‘गड्ढों का शहर’ बनने की कगार पर नगर
विकास या विनाश ? औरंगाबाद में ₹411 करोड़ के सीवेज प्रोजेक्ट में खुली तकनीकी नियमों की धज्जियां !
विशेष रिपोर्ट: बिहार के औरंगाबाद शहर के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार की ‘अमृत 2.0’ (AMRUT 2.0) योजना के तहत ₹411.08 करोड़ की लागत से एक मेगा सीवरेज प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 20 MLD (Million Liters per Day) क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), 196 किलोमीटर लंबा भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन नेटवर्क और 8 पंपिंग स्टेशनों का निर्माण किया जाना है।
कागजों पर यह प्रोजेक्ट औरंगाबाद की सूरत बदलने वाला है, लेकिन धरातल पर जिस ढंग से कार्य हो रहा है, उसने जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगर यही आलम रहा, तो आने वाले 10 वर्षों में औरंगाबाद की हर सड़क और हर गली एक बड़े और जानलेवा गड्ढे में तब्दील हो जाएगी।
🛠️ तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर हो रही ‘बैक-फिलिंग’
इस प्रोजेक्ट के तहत सड़कों के बीचों-बीच 10-10 फीट गहरे गड्ढे (ट्रेंच) खोदे जा रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पाइप डालने के बाद उन गड्ढों को नियमों के अनुसार भरने के बजाय, उसी खोदी गई गीली और ढीली मिट्टी से वापस भरा जा रहा है।
इंजीनियरिंग का बुनियादी नियम: कंस्ट्रक्शन लाइन या सिविल इंजीनियरिंग में आज तक ऐसी कोई कार्यप्रणाली (Methodology) ईजाद नहीं हुई है, जो 10 फीट गहरी गीली मिट्टी को पूरी तरह कॉम्पैक्ट (मजबूत) कर सके।
आमतौर पर किसी भी गहरी ट्रेंच की बैक-फिलिंग के लिए बालू (Sand), डस्ट (Stone Dust), या फ्लाई ऐश (Fly Ash) का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि भविष्य में जमीन नीचे न धंसे। लेकिन औरंगाबाद में पहली बार ऐसा अजीबोगरीब कंस्ट्रक्शन देखने को मिल रहा है जहाँ गहरे गड्ढों को सिर्फ गीली मिट्टी से पाटकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
⚠️ क्या होंगे इसके घातक परिणाम?
अगर प्रशासन और आम जनता ने अभी से जागरूक होकर ठेकेदार की इस मनमानी को नहीं रोका, तो औरंगाबाद के नागरिकों को ये भुगतना पड़ेगा:
सड़कों का धंसना: पहली ही तेज बारिश में ये 10 फीट गहरे गड्ढे अंदर की तरफ धंस जाएंगे, जिससे पूरी सड़क दलदल में बदल जाएगी।
जानलेवा हादसे: अधकचरे ढंग से भरे गए ये गड्ढे भविष्य में भारी वाहनों (ट्रक, बस) के नीचे आते ही धंस सकते हैं, जिससे बड़े हादसे हो सकते हैं।
10 साल की बर्बादी: एक बार सड़क धंसने के बाद उसे फिर से ठीक करने में सालों का वक्त लगेगा, यानी औरंगाबाद ‘गड्ढों का शहर’ बनकर रह जाएगा।
📢 समय रहते जागना जरूरी
यह प्रोजेक्ट जनता के टैक्स के पैसों से बन रहा है। ₹411 करोड़ का यह बजट औरंगाबाद को आधुनिक बनाने के लिए मिला है, न कि उसे नरक बनाने के लिए। स्थानीय प्रशासन, जिला अधिकारी (DM) और बुडको (BUIDCo) के आला अधिकारियों को तुरंत इस कंस्ट्रक्शन साइट का औचक निरीक्षण करना चाहिए।
अगर आज औरंगाबाद की जनता ने इस घटिया निर्माण के खिलाफ आवाज नहीं उठाई, तो आने वाली पीढ़ी को टूटी सड़कों और अंतहीन गड्ढों का दंश झेलना पड़ेगा।