Home » बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार- “कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता किसान के खेत में दिखनी चाहिए”
कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता प्रयोगशाला में नहीं, किसान के खेत में दिखनी चाहिए: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार !
रांची: झारखंड के राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री संतोष कुमार गंगवार ने कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों का आह्वान किया है कि अनुसंधान का सीधा लाभ किसानों तक पहुँचना चाहिए। वे बृहस्पतिवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU), राँची के 9वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल महोदय ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता प्रयोगशाला में बंद फाइलों में नहीं, बल्कि किसान के खेत में फसल के रूप में दिखाई देनी चाहिए।”
1. सीमित संसाधनों में आय बढ़ाने और लागत घटाने पर जोर
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमें ऐसी तकनीकें और वैज्ञानिक पद्धतियाँ विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा, जिनसे किसान सीमित भूमि और कम संसाधनों में भी अधिक उत्पादन एवं आय प्राप्त कर सकें।
उन्होंने तीन मुख्य बिंदुओं पर काम करने की आवश्यकता बताई:
उत्पादन लागत में कमी: आधुनिक और किफायती तरीकों से खेती का खर्च घटाना।
मृदा एवं जल संरक्षण: मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों को बचाना।
तकनीक का व्यावहारिक उपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, सटीक कृषि (Precision Farming) और आधुनिक सिंचाई पद्धतियाँ तभी सार्थक हैं, जब वे आम किसान के लिए आसान और उपयोगी हों।
2. झारखण्ड की भौगोलिक चुनौतियाँ और जल संरक्षण
राज्य की कृषि परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड का बड़ा हिस्सा पठारी है। इसके कारण वर्षा का अधिकांश जल बहकर निकल जाता है और कई इलाकों में सिंचाई के साधन सीमित हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने निम्नलिखित पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई:
वर्षाजल संचयन (Rainwater Harvesting): बारिश के पानी का बेहतर प्रबंधन और भंडारण।
सिंचाई का विस्तार: आधुनिक और कम पानी वाली सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना।
फसल विविधीकरण (Crop Diversification): स्थानीय मौसम और मिट्टी के अनुकूल विविध फसलों की खेती।
3. ‘विकसित भारत@2047’ और युवाओं के लिए अवसर
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय उन्नत किस्म के बीजों, पौध सामग्री, परामर्श और कृषि प्रसार के जरिए सराहनीय कार्य कर रहा है।
उन्होंने युवाओं से रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला (Job Creator) बनने का आग्रह किया। कृषि-आधारित स्टार्टअप, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), बागवानी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसे क्षेत्रों में असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के सपने को साकार करने में युवा कृषि वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और उद्यमियों की भूमिका निर्णायक होगी।
दीक्षांत समारोह में छात्राओं की बड़ी संख्या में भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारी बेटियाँ शिक्षा, विज्ञान, कृषि अनुसंधान और उद्यमिता के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
4. दिवंगत रूपी सोरेन जी को दी श्रद्धांजलि
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल महोदय ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’ दिवंगत शिबू सोरेन जी की धर्मपत्नी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की माताजी रूपी सोरेन जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
राज्य निर्माण में शिबू सोरेन जी के ऐतिहासिक योगदान का स्मरण करते हुए उन्होंने दिवंगत रूपी सोरेन जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल सोरेन परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
राज्यपाल का संदेश:
“अपने ज्ञान को खेत तक, विज्ञान को किसान तक और नवाचार को समाज तक पहुँचाएँ। शिक्षा की वास्तविक सार्थकता तभी है जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति और संपूर्ण समाज को मिले।”