Home » गढ़वा: कस्तूरबा विद्यालय में फूड पॉइजनिंग, 100 से ज्यादा छात्राएं अस्पताल में भर्ती
गढ़वा में हड़कंप: कस्तूरबा विद्यालय की 100 से अधिक छात्राएं फूड पॉइजनिंग का शिकार, अस्पताल में मची चीख-पुकार!
🛑 बड़ी लापरवाही: भीषण गर्मी में छात्राओं को पिलाया टंकी का खौलता पानी, दोपहर के खाने के बाद बिगड़ी तबीयत, वॉर्डन गायब!
गढ़वा (खरौंधी): झारखंड के गढ़वा जिले से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की 100 से अधिक छात्राएं कथित तौर पर फूड पॉइजनिंग (दूषित भोजन) का शिकार हो गई हैं। भीषण गर्मी के बीच हॉस्टल के खाने और छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का उबलता हुआ पानी पीने की वजह से एक के बाद एक बच्चियों की तबीयत खराब होने लगी। आनन-फानन में सभी पीड़ित छात्राओं को भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, करीब 20 से अधिक छात्राओं की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है।
🚨 दोपहर के भोजन में मिला था ‘पुआ-चावल’, फिर शुरू हुआ उल्टी-दस्त का दौर
अस्पताल में भर्ती पीड़ित छात्राओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि दोपहर के भोजन में उन्हें ‘पुआ’ और चावल परोसा गया था। भोजन करने के कुछ ही घंटों बाद शाम से छात्राओं को पेट में तेज दर्द, उल्टी और दस्त (Diarrohea) की शिकायत होने लगी।
छात्राओं का आरोप है कि:
खौलता हुआ पानी: कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के कारण छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का पानी पूरी तरह उबल रहा था। बिजली गुल होने की वजह से नीचे का पानी उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में वही खौलता पानी पीना पड़ा।
प्रबंधन की मनमानी: परिसर में जनरेटर की सुविधा होने के बावजूद पानी की मोटर नहीं चलाई गई ताकि बच्चियों को ताजा और साफ पानी मिल सके।
😡 हॉस्टल में कोई जिम्मेदार नहीं; अभिभावकों को गेट पर रोका, जमकर हुआ हंगामा
इस दर्दनाक घटना ने विद्यालय प्रबंधन की सुरक्षा और संवेदनशीलता की पोल खोलकर रख दी है। जब यह घटना घटी, तब हॉस्टल में न तो वॉर्डन मौजूद थीं और न ही कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी। पूरा हॉस्टल सिर्फ एक सुरक्षा गार्ड के भरोसे छोड़ दिया गया था।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा: शाम को जब बच्चियों की तबीयत बिगड़ी, तो प्रबंधन मामले को दबाने में जुटा रहा। देर रात जब बच्चियों की हालत गंभीर हुई और इसकी भनक परिजनों को लगी, तो वे भागते हुए स्कूल पहुंचे। लेकिन गार्ड ने उन्हें घंटों मुख्य द्वार (मेन गेट) पर ही रोक कर रखा, जिससे स्कूल के बाहर जमकर हंगामा हुआ।
बाद में स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों (भवनाथपुर बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी शंभू राम) ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद गेट खुलवाया गया और रात के करीब 9 बजे से बच्चियों को अस्पताल ले जाने का सिलसिला शुरू हुआ।
📋 स्थिति अब नियंत्रण में, जांच के आदेश
प्रशासनिक टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए डॉक्टरों को अलर्ट पर रखा। सिविल सर्जन (CS) और पीएचसी प्रभारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्राथमिक दृष्टि से यह मामला फूड पॉइजनिंग और अत्यधिक गर्म पानी पीने (Heat Stroke व डिहाइड्रेशन) का है। सभी बच्चियों को स्लाइन (Glucose) और जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं। फिलहाल डॉक्टरों के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खाने और पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं और लापरवाही बरतने वाले स्कूल स्टाफ व वॉर्डन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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