Home » राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी का भावुक संदेश: “झारखंड में मेरे हर जमीनी कार्य की धुरी थीं डॉ. नुसरत जहां सिद्दीकी, उनका जाना अपूरणीय क्षति”
नई दिल्ली/रांची :झारखंड की जमीनी राजनीति और सामाजिक बदलावों में एक अमिट छाप छोड़ने वाली डॉ. नुसरत जहां सिद्दीकी के असामयिक निधन से हर आंख नम है। हाल ही में राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी के रूप में झारखंड लौटे ने दिवंगत डॉ. नुसरत के आवास पर पहुंचकर उनके शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
सांसद ने डॉ. नुसरत को याद करते हुए एक बेहद भावुक संदेश साझा किया, जो उनके बीच के गहरे कार्य-संबंधों और समर्पण को दर्शाता है।

जमीनी बदलावों की मार्गदर्शक थीं डॉ. नुसरत
”डॉ. नुसरत जहां सिद्दीकी का इतनी कम उम्र में अचानक चले जाना एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। झारखंड में हमारे जितने भी जमीनी प्रयास, सामाजिक कार्य और पहल हुईं, उन सभी के पीछे डॉ. नुसरत ही असली मार्गदर्शक और मुख्य प्रेरक शक्ति (Driving Force) थीं।”
HOP NGO के जरिए बदला हजारों का जीवन
डॉ. नुसरत केवल एक सहयोगी नहीं, बल्कि एक जुझारू सामाजिक योद्धा थीं। उन्होंने HOP NGO का नेतृत्व करते हुए निस्वार्थ भाव और अटूट प्रतिबद्धता के साथ काम किया। झारखंड के दूर-दराज के क्षेत्रों में संगठन के जमीनी प्रयासों को मुख्य सूत्रधार (Principal Coordinator) के रूप में जोड़ने का काम उन्होंने बखूबी किया। आज झारखंड में जो भी विकासात्मक और सामाजिक कार्य दिखाई दे रहे हैं, उनमें डॉ. नुसरत के समर्पण और निस्वार्थ योगदान की साफ झलक मिलती है।
”एक सांसद के रूप में वापसी पर उनकी कमी खल रही है”
सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि एक सांसद के रूप में जब वे दोबारा झारखंड की धरती पर लौटे हैं, तो हर मोड़ पर डॉ. नुसरत की कमी बहुत गहराई से महसूस हो रही है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की:
दिवंगत पवित्र आत्मा को अपने चरणों में शाश्वत शांति प्रदान करें।
इस असहनीय और असीम दुःख की घड़ी में उनके परिवार को संबल और साहस मिले।
संपादकीय टिप्पणी: डॉ. नुसरत जहां सिद्दीकी का योगदान झारखंड के सामाजिक इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जीवन और उनका कार्य आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।