Home » झारखंड में SIR अभियान: BLA-2 बनाने में BJP से पिछड़ी कांग्रेस, कई सीटों पर खाता भी नहीं खुला
रांची: झारखंड में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR (Special Intensive Revision – विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान के दौरान राजनीतिक दलों की जमीनी तैयारी का एक बड़ा अंतर सामने आया है।
बूथ स्तर पर वोटरों को जोड़ने और त्रुटियां सुधारने के लिए जरूरी BLA-2 (Booth Level Agent – फॉर्म 2) की नियुक्ति के मामले में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी, मुख्य विपक्षी दल भाजपा (BJP) के मुकाबले काफी पीछे छूट गई है।
हालत यह है कि राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी का एक भी BLA-2 नियुक्त नहीं हो सका है।
🚨 मुख्य हाइलाइट्स (Key Highlights)
ग्राउंड जीरो पर सुस्ती: चुनावी तैयारियों और बूथ मैनेजमेंट को लेकर कांग्रेस का ढीला रवैया एक बार फिर उजागर।
बीजेपी की बढ़त: राज्य के लगभग सभी बूथों पर बीजेपी ने समय रहते अपने बूथ लेवल एजेंट्स (BLA-2) को तैनात कर मजबूत बढ़त बना ली है।
शून्य पर सिमटी कांग्रेस: कई अहम विधानसभा क्षेत्रों की लिस्ट सामने आई है जहाँ कांग्रेस सांगठनिक रूप से ‘जीरो’ साबित हुई है।
❓ क्या होता है BLA-2 और क्यों यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है?
चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, राजनीतिक दल हर पोलिंग स्टेशन (बूथ) के लिए अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करते हैं। जब आयोग SIR (विशेष संशोधन) चलाता है, तो Form BLA-2 के जरिए इन एजेंटों को आधिकारिक मान्यता मिलती है।
ये एजेंट सीधे सरकारी BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के साथ बैठकर फर्जी वोटरों के नाम हटवाने और नए वोटरों के नाम जुड़वाने का काम करते हैं।
जिस विधानसभा में पार्टी का BLA-2 ही नहीं होगा, वहाँ विपक्ष मनमाने ढंग से मतदाता सूची में संशोधन करवा सकता है, जिसका सीधा नुकसान चुनाव के दिन वोट प्रतिशत पर पड़ता है।
📉 कांग्रेस की विफलता के राजनीतिक मायने
बूथ मैनेजमेंट की स्थितिजमीनी असर
भाजपा (BJP)माइक्रो-मैनेजमेंट और पन्ना प्रमुखों के जरिए 95% से अधिक बूथों पर BLA-2 एक्टिव।नए वोटर्स जोड़ने और स्क्रूटनी में भारी बढ़त।
कांग्रेस (Congress)आपसी गुटबाजी और समन्वय की कमी के चलते कई विधानसभा क्षेत्रों में आंकड़ा 0%।मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत करने वाला कोई नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहां बीजेपी चौबीसों घंटे चुनावी मोड में रहकर अपने संगठनात्मक ढांचे को धार दे रही है, वहीं झारखंड कांग्रेस बड़े दावों के बावजूद बूथ स्तर पर बेहद कमजोर साबित हो रही है। यदि कांग्रेस ने जल्द ही इस मोर्चे पर अपनी सुस्ती दूर नहीं की, तो आगामी चुनावों में मतदाता सूची के स्तर पर ही वह रेस से बाहर हो सकती है।
