Home » हजारीबाग जिला परिषद में टेंडर का खेल? 52 वाटर सप्लाई सिस्टम की प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
हजारीबाग: हजारीबाग जिला परिषद कार्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मामला जिला के विभिन्न प्रखंडों में प्रस्तावित 52 वाटर सप्लाई सिस्टम (Water Supply System) लगाने के लिए निकाले गए टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि 28 जून 2026 को टेंडर प्रक्रिया के दौरान मात्र 15 टेंडर पेपर ही बेचे गए, जबकि बाकी पेपरों को कथित तौर पर दबा दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब इच्छुक ठेकेदारों ने टेंडर पेपर खरीदने की कोशिश की, तो उन्हें बताया गया कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस दौरान बड़ी संख्या में टेंडर पेपर अनुपलब्ध बताए गए, जिससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय ठेकेदारों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि यह पूरी कवायद जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के मौन समर्थन से हुई है।
प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका
ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर पेपर छिपाने का यह निर्देश जिला परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जिला प्रशासन के स्तर से आया था। इस गंभीर आरोप ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह टेंडर भी ‘दलाली’ और ‘सेटिंग’ की भेंट चढ़ जाएगा?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों की नजर अब जिला उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) पर टिकी है। लोग मांग कर रहे हैं कि इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि जनहित की योजनाओं का लाभ आम जनता तक ईमानदारी से पहुँच सके।
लेख को अधिक आकर्षक बनाने के सुझाव:
फोटो का प्रयोग: यदि आपके पास जिला परिषद कार्यालय या टेंडर नोटिस की कोई फोटो है, तो उसे ऊपर ‘Featured Image’ के रूप में लगाएं।
Highlighting: मुख्य तथ्यों (जैसे “52 वाटर सप्लाई”, “28 जून”, “15 टेंडर पेपर”) को बोल्ड रखें।
Call to Action: लेख के अंत में एक लाइन जोड़ें— “क्या आप भी इस टेंडर प्रक्रिया से प्रभावित हैं? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं या हमारे साथ सबूत साझा करें।”
Formatting: वेबसाइट पर पोस्ट करते समय छोटे पैराग्राफ का उपयोग करें जैसा ऊपर दिया गया है, ताकि पाठक मोबाइल पर आसानी से पढ़ सकें।