Home » हूल दिवस: संथाल हूल देश की आजादी की पहली मशाल थी, कांग्रेस ने सिदो-कान्हू को किया नमन
संथाल हूल ने हिला दी थी अंग्रेजी साम्राज्य की नींव, शहीदों का संघर्ष आज भी हमारी प्रेरणा: केशव महतो कमलेश
हूल दिवस पर रांची के सिद्धू-कान्हू पार्क में कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि; जल, जंगल, जमीन और संविधान की रक्षा का लिया संकल्प
रांची: हूल दिवस के अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगनाओं फूलो-झानो को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सुबह 11 बजे कांग्रेस भवन, रांची में सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद, नेताओं ने मोराबादी स्थित सिद्धू-कान्हू पार्क जाकर उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के इन महानायकों के बलिदान को याद किया।
“हूल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि यह अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प दिवस है।” — प्रदेश कांग्रेस कमेटी
🔴 संथाल हूल: देश की पहली संगठित जनक्रांति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संथाल हूल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसके मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया:
ऐतिहासिक शंखनाद: 30 जून 1855 को संथाल परगना के भगनाडीह से सिदो-कान्हू ने अंग्रेजी हुकूमत, महाजनी शोषण और जमींदारी अत्याचार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था।
1857 से भी पहले की क्रांति: यह वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी पहले हुआ एक ऐसा महान जनविद्रोह था, जिसने अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
हजारों का सर्वोच्च बलिदान: इस आंदोलन में सिदो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलो और झानो सहित हजारों आदिवासी वीरों ने अपनी मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी।
प्रशासनिक बदलाव की नींव: इसी ऐतिहासिक संघर्ष का नतीजा था कि अंग्रेजों को आदिवासी क्षेत्रों की व्यवस्था बदलनी पड़ी और आगे चलकर संथाल परगना एक अलग प्रशासनिक इकाई बना।
🏛️ जल-जंगल-जमीन और संविधान की रक्षा का संकल्प
केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड की माटी सदैव वीरों और क्रांतिकारियों की धरती रही है। कांग्रेस पार्टी शहीदों के सपनों के अनुरूप सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
👥 कार्यक्रम में ये प्रमुख नेता रहे उपस्थित
शहीदों के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने वालों में मुख्य रूप से शामिल थे:
राजेश ठाकुर, सतीश पाल मुंजिनी, आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव, कुमार गौरव, बिनय सिन्हा, कुमार राजा, राकेश किरण महतो, केदार पासवान, निरंजन पासवान, धर्मराज राम, केके गिरि, सूर्यकांत शुक्ला, सुरेन राम, मदन महतो, प्रशांत पांडे, जगदीश साहु, नवीन कुमार सिंह और विरेन्द्र विक्रम।
वेबसाइट पर अपलोड करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
इमेज (Image): यदि आपके पास कांग्रेस नेताओं द्वारा मोराबादी स्थित पार्क में माल्यार्पण करने की कोई लाइव तस्वीर है, तो उसे मुख्य हेडिंग के ठीक नीचे लगाएं।
इनलाइन हाइलाइट्स: पैराग्राफ के मुख्य शब्दों (जैसे भोगनाडीह, 30 जून 1855) को बोल्ड ही रहने दें, इससे सर्च इंजन और पाठक दोनों को आसानी होती है।