Home » झारखंड की राजनीति में बड़ा धमाका: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का चुनावी राजनीति से संन्यास का एलान!
रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों सुर्खियों के केंद्र बने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर ऐसा फैसला लिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में सुरक्षा व्यवस्था और आधिकारिक गाड़ियां लौटाने को लेकर चर्चा में रहे वित्त मंत्री ने अब अपने चुनावी राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने का बड़ा एलान कर दिया है।
“राजनीति में पड़ाव जरूरी, स्वतः अवकाश ले लेना चाहिए”
रांची स्थित अपने निजी आवास पर मीडिया और समर्थकों के बीच अपनी यह इच्छा जाहिर करते हुए राधाकृष्ण किशोर ने साफ किया कि वह आगामी 2029 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
अपने लंबे सियासी सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा:
“मैं महज 25 वर्ष की उम्र में पहली बार विधायक बना था। तब से लेकर आज तक मैंने राजनीति में एक बहुत लंबा और समृद्ध सफर तय किया है। जीवन के हर क्षेत्र की तरह राजनीति में भी एक ठहराव और पड़ाव बेहद जरूरी है। एक समय के बाद आपको स्वतः ही अवकाश (रिटायरमेंट) ले लेना चाहिए।”
⚡ सुर्खियों में क्यों हैं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर?
राधाकृष्ण किशोर का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब पिछले कुछ दिनों से झारखंड पुलिस मुख्यालय (DGP) के साथ वाहनों के आवंटन को लेकर चल रहे विवाद के कारण वे लगातार मीडिया की हेडलाइंस में बने हुए हैं।
सुरक्षा वापसी का विवाद: काफिले में एक अतिरिक्त गाड़ी की मांग पूरी न होने से आहत होकर मंत्री ने अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था और आधिकारिक वाहन राज्य सरकार को लौटा दिए थे।
बिना सुरक्षा के दौरा: वह लगातार बिना किसी एस्कॉर्ट या गार्ड के सचिवालय और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
संगठनात्मक नाराजगी: इस प्रशासनिक खींचतान के बीच अचानक चुनावी राजनीति से संन्यास के इस एलान ने राज्य के सियासी समीकरणों को गर्मा दिया है।
📊 राधाकृष्ण किशोर: एक नजर में सियासी सफर
शुरुआत: मात्र 25 वर्ष की युवा उम्र में पहली बार विधायक चुने गए।
अनुभव: बिहार से लेकर झारखंड के अलग होने तक कई महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों और मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
वर्तमान पद: हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से कद्दावर कैबिनेट मंत्री और राज्य के वित्त विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं।
वरिष्ठ नेता के इस फैसले के बाद अब झारखंड कांग्रेस और महागठबंधन के भीतर भी नए उत्तराधिकारी और 2029 के चुनावी रोडमैप को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।