Home » राम मंदिर दान घोटाला: कांग्रेस नेता मानिक राव ठाकरे का केंद्र और योगी सरकार पर बड़ा हमला, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
राम मंदिर दान घोटाला: “चंपत राय का इस्तीफा ही भ्रष्टाचार का सबूत”, कांग्रेस ने पीएम मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल ?
रांची: कांग्रेस के गोवा, दमन एवं दादरा नगर हवेली के प्रभारी और पूर्व मंत्री मानिक राव ठाकरे ने राम मंदिर दान घोटाले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। रांची में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के बावजूद इस मामले में सरकार की ओर से कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की गई है।
इस मौके पर कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, महासचिव राजीव रंजन और वरिष्ठ नेता शाहजादा अनवर, सोनल शांति और राजन वर्मा भी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
पीएम मोदी की चुप्पी पर खड़े किए गंभीर सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानिक राव ठाकरे ने इस पूरे प्रकरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तीखे प्रश्न किए:
जिम्मेदारी कौन लेगा?: “जब इस ट्रस्ट का गठन खुद प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ था, तो इस घोटाले की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
इस्तीफा क्यों देना पड़ा?: “अगर सब कुछ सही था, तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा? उनका इस्तीफा स्वीकार होना ही यह साबित करता है कि यह महज प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक बड़ा घोटाला है।”
स्वतंत्र जांच से डर क्यों?: “अगर कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, तो सरकार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने से क्यों डर रही है? क्या ‘डबल इंजन’ सरकार बड़े दोषियों को बचा रही है?”
“भगवान राम किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था हैं। उनके नाम पर हुए चंदे की हेराफेरी देश बर्दाश्त नहीं करेगा।”
— मानिक राव ठाकरे, पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता
कांग्रेस की मुख्य मांगें: ट्रस्ट भंग हो, दर्ज हो FIR
पूर्व मंत्री ने मांग की है कि पीएम मोदी देश के सामने आएं और स्पष्ट करें कि ट्रस्ट के गठन और उसकी प्रशासनिक निगरानी में पीएमओ (PMO) की क्या भूमिका रही है। कांग्रेस ने निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
गिरफ्तारी की मांग: पूर्व महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और घोटाले में शामिल अन्य रसूखदार लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
नया पारदर्शी ट्रस्ट: वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तुरंत भंग करके धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों और विशेषज्ञों को शामिल कर एक नया पारदर्शी ट्रस्ट बनाया जाए।
फॉरेंसिक ऑडिट: मंदिर को मिले कुल चंदे, चढ़ावे, जमीन की खरीद-बिक्री और आयोजनों के खर्चों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
एसआईटी (SIT) रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे: जूतों और जेबों में छिपाए नोट
मानिक राव ठाकरे ने बताया कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके बैंकिंग पार्टनर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बेहद गंभीर लापरवाहियों को उजागर किया है:
नोटों की चोरी: जांच में ऐसी 70 घटनाएं पाई गईं जहां नोट गिनने वाले कर्मचारी खुली नकदी और नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाकर ले जा रहे थे।
सुरक्षा में चूक: सीसीटीवी निगरानी के बावजूद काउंटिंग रूम में आने-जाने वालों की अनिवार्य तलाशी नहीं ली गई।
बड़ों को बचाने की कोशिश: इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद भी एसआईटी ने केवल 8 छोटे कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की है, जिससे साफ है कि बड़े रसूखदारों को बचाया जा रहा है।
भव्य आयोजनों के खर्च भी जांच के दायरे में
एसआईटी अब मंदिर के बड़े कार्यक्रमों के खर्चों की भी स्क्रूटनी कर रही है, जिसमें भारी-भरकम खर्च की बात सामने आई है:
प्राण-प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024): 8,000 मेहमानों के लिए करीब 113 करोड़ रुपये का खर्च।
ध्वजारोहण कार्यक्रम (25 नवंबर 2025): लगभग 10.12 करोड़ रुपये का खर्च।
इसके अलावा फर्जी रसीदों और नकद चढ़ावे में हेराफेरी के कई आरोप हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान मामले ने भी भक्तों की इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने नए महासचिव बनाए गए आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन पर पहले से ही मामले को दबाने और लीपापोती करने के आरोप लग रहे हैं, जिससे ट्रस्ट की साख पर लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है।