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रांची में विश्व जनसंख्या दिवस पर कार्यशाला: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का बड़ा ऐलान, जल्द बनेगा रिम्स-2 !
रांची: होटल बीएनआर चाणक्य, रांची में विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक भव्य संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कई बड़ी घोषणाएं कीं। कार्यक्रम के दौरान जनसंख्या नियंत्रण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों, सहियाओं, एएनएम और अन्य पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।

“झारखंड के मरीजों का पूरा भार अभी सिर्फ एक ही रिम्स (RIMS) पर है। इसे कम करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से रांची में एक नए एम्स (AIIMS) की स्थापना पर सकारात्मक बातचीत हुई है। इसके साथ ही रिम्स-2 (RIMS-2) भी जल्द ही अस्तित्व में आएगा। हमारा लक्ष्य झारखंड के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।”
— डॉ. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री, झारखंड
स्वास्थ्य मंत्री की बड़ी घोषणाएं और प्राथमिकताएं:
सहिया बहनों के लिए एम्बुलेंस: सहिया बहनों से जुड़ी समस्याओं को केंद्र सरकार के सामने रखा गया है और उनके लिए 400 छोटी एम्बुलेंस की मांग की गई है।
मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज: राज्य के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का प्रयास जारी है। साथ ही नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए निजी निवेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है।
सदर अस्पतालों का अपग्रेडेशन: राज्य के सभी सदर अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए अलग वार्ड होंगे और सी-सेक्शन (सिजेरियन) प्रसव के लिए विशेष सेंटर खोले जाएंगे।
पोस्टर का अनावरण: स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर ‘अंतरा पोस्टर’, ‘इम्प्लांट’ और ‘पीपीएफ पोस्टर’ का अनावरण किया।
बढ़ती जनसंख्या: चुनौती नहीं, इसे ‘अवसर’ बनाएंगे
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या को हमें चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि एक अवसर (मानव संसाधन) के रूप में देखना चाहिए।
अपर मुख्य सचिव द्वारा साझा किए गए मुख्य बिंदु:
कौशल विकास पर जोर: युवाओं को बेहतर शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट देकर उन्हें देश और राज्य के विकास का भागीदार बनाया जा रहा है।
शिशु मृत्यु दर और कुपोषण पर फोकस: एनएचएम (NHM) का पूरा ध्यान मैटरनिटी और चाइल्ड केयर पर है। इन्फेंट मॉर्टलिटी रेट (शिशु मृत्यु दर) और कुपोषण को खत्म करना हमारी बड़ी जिम्मेदारी है।
सी-सेक्शन का विकेंद्रीकरण: वर्तमान में सदर अस्पतालों में सी-सेक्शन के मामले बहुत अधिक हैं। सरकार का लक्ष्य इसे नीचे (सीएचसी और सब-सेंटर स्तर पर) ले जाना है। इसके लिए हर जिले में 100 बेड का एक स्पेशल सेंटर खुलेगा। अगले दो वर्षों में सब-सेंटर और सीएचसी (CHC) में भी सी-सेक्शन ऑपरेशन की सुविधा शुरू करने का लक्ष्य है।
मइयाँ सम्मान योजना: इस योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से मौतों पर पाया काबू: शशि प्रकाश झा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने कहा कि भारत आबादी के मामले में पहले स्थान पर है, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण हमने कई गंभीर बीमारियों से होने वाली मौतों पर काबू पाया है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के जरिए जनसंख्या को नियंत्रित कर हम आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास हासिल कर सकते हैं।
वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी साझा किए अपने विचार
डॉ. प्रभात कुमार (सिविल सर्जन, रांची): उन्होंने बढ़ती आबादी के कारण पर्यावरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और भूमिगत जल पर पड़ने वाले दबाव पर चिंता जताई। उन्होंने कम उम्र में विवाह को नियंत्रित करने और युवाओं के कौशल विकास पर जोर दिया।
डॉ. पुष्पा (राज्य नोडल पदाधिकारी): उन्होंने परिवार नियोजन के उपायों की जानकारी देते हुए झारखंड सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में हासिल की गई उपलब्धियों का ब्योरा रखा।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित:
इस कार्यशाला में गुणवत्ता कोषांग के नोडल पदाधिकारी डॉ. रंजीत, परिवार नियोजन कोषांग की नोडल पदाधिकारी डॉ. पुष्पा, खूंटी के सिविल सर्जन डॉ. ललित रंजन पाठक, डॉ. रवि रंजन, डॉ. एन. डी. मिश्रा सहित स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी और विभिन्न पंचायतों के मुखिया उपस्थित थे।