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झारखंड में निवेश पर JMM का पलटवार: विनोद पांडेय बोले— ‘निवेश प्रक्रिया नहीं समझती BJP, 70 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार’
रांची: झारखंड में औद्योगिक निवेश को लेकर सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा द्वारा सरकार के निवेश दावों पर उठाए गए सवालों का JMM ने कड़ा जवाब दिया है।
JMM के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाजपा के आरोपों को ‘तथ्यों से परे’ और ‘राजनीतिक हताशा का परिणाम’ बताया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खुद को विश्व की सबसे ज्ञानी पार्टी बताने वाली भाजपा के नेताओं को निवेश की बुनियादी प्रक्रिया (LoI और MoU के अंतर) की समझ ही नहीं है।
🚨 मुख्य बातें जो आपको जाननी चाहिए:
रोजगार की उम्मीद: इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से राज्य में 70,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
भ्रम फैलाने का आरोप: JMM का कहना है कि भाजपा जानबूझकर जनता को गुमराह कर रही है।
जिंदल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: यह कदम भारत सरकार के न्यूक्लियर शांति एक्ट के तहत उठाया जा रहा है।
LoI और MoU में क्या अंतर है? JMM ने समझाया
विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा नेताओं को निवेश प्रक्रिया का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) और एमओयू (MoU) दो अलग-अलग चरण होते हैं।
“मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में फरवरी 2026 में दावोस और यूके दौरे के दौरान वैश्विक कंपनियों ने झारखंड में निवेश के लिए LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) सौंपे थे। इसके बाद 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हितधारक परामर्श-2026 में इन्हीं प्रस्तावों को औपचारिक MoU में बदला गया। भाजपा जिसे ‘री-पैकेजिंग’ कह रही है, वह वास्तव में किसी भी औद्योगिक निवेश को अंतिम रूप देने की स्वाभाविक प्रक्रिया है।”
पांडेय ने आगे कहा कि अगर कोई कंपनी दावोस में इच्छा जताती है और दिल्ली में उस पर हस्ताक्षर होते हैं, तो उसे ‘फर्जी’ कहना भाजपा की अज्ञानता को दर्शाता है।
जिंदल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर भाजपा को घेरा
जिंदल न्यूक्लियर पावर परियोजना पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए JMM महासचिव ने कहा कि राज्य सरकार का यह कदम भारत सरकार के न्यूक्लियर शांति एक्ट के तहत उठाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया, “क्या प्रदेश भाजपा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा इतनी बढ़ गई है कि अब वह भारत सरकार की नीतियों को भी नजरअंदाज कर रही है?”
“झारखंड के विकास से डर रही है भाजपा”
विनोद पांडेय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार झारखंड को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हरित ऊर्जा (Green Energy), पर्यटन और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अग्रणी बनाना चाहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 70 हजार से अधिक रोजगार मिलने की संभावना से भाजपा परेशान है। भाजपा नहीं चाहती कि झारखंड का युवा विकास की मुख्यधारा से जुड़े, क्योंकि युवाओं को बेहतर भविष्य मिलते ही भाजपा की नकारात्मक राजनीति समाप्त हो जाएगी।