Home » झारखंड में परिवहन व्यवस्था ठप: सितंबर 2024 से बंद हैं वाहनों के रोड परमिट, ईएमआई के बोझ तले दबे वाहन मालिक
गाड़ी शोरूम से घर आई, पर सड़क पर चलने की ‘नो एंट्री’! झारखंड में थमे नए यात्री वाहनों के पहिए, सो रहा परिवहन विभाग !
रांची: झारखंड देश का शायद पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां पिछले लगभग दो सालों से (सितंबर 2024 के बाद से) किसी भी नए यात्री वाहन को रोड परमिट जारी नहीं किया गया है। राज्य की परिवहन व्यवस्था और इससे जुड़े व्यवसाय पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ चुके हैं। एक तरफ सरकार और परिवहन विभाग गहरी नींद में सोया है, वहीं दूसरी तरफ सूबे के सैकड़ों वाहन मालिक पाई-पाई को मोहताज हो रहे हैं।
🗂️ फाइलों में दबा भविष्य: 600 से अधिक आवेदन लंबित
सरकारी दफ्तरों की लेट-लतीफी और उदासीनता का आलम यह है कि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) में परमिट के लिए 100 से अधिक और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारों (RTA) में 500 से अधिक आवेदन लंबे समय से धूल फांक रहे हैं। आवेदनों का यह अंबार लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन विभाग की तरफ से फाइलों को आगे बढ़ाने की कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है।
बिना कमाई, सिर्फ ईएमआई!
“वाहन मालिकों ने लाखों रुपये का लोन लेकर गाड़ियां खरीदीं ताकि रोजगार का जरिया बन सके। लेकिन परमिट न मिलने की वजह से गाड़ियां खड़ी-खड़ी कबाड़ हो रही हैं और मालिक अपनी जेब से हर महीने बैंक की भारी-भरकम किस्त (EMI) भर रहे हैं। यह सरासर आर्थिक शोषण है।”
📉 वाहन मालिकों पर दोहरी मार, सरकार इत्मीनान
इस प्रशासनिक नाकामी की वजह से झारखंड के स्वरोजगार करने वाले युवाओं और ट्रांसपोर्टर्स को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिना किसी संचालन के लोन पर ब्याज और टैक्स का मीटर चालू है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर आर्थिक संकट से जहां वाहन मालिक बुरी तरह परेशान और त्रस्त हैं, वहीं परिवहन विभाग और झारखंड सरकार पूरी तरह इत्मीनान और बेफिक्र बैठी है।
यात्री वाहनों के न चलने से न सिर्फ ट्रांसपोर्टर्स बर्बाद हो रहे हैं, बल्कि आम जनता को भी सुलभ परिवहन सेवा से वंचित होना पड़ रहा है।
📢 मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से सीधे सवाल
इस गंभीर संकट को देखते हुए पीड़ित वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (@HemantSorenJMM) और परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ (@deepakbiruajmm) से सोशल मीडिया और ज्ञापनों के जरिए गुहार लगाई है।
व्यवसायियों का कहना है कि अगर जल्द ही STA और RTA की लंबित बैठकों का आयोजन कर परमिट जारी नहीं किए गए, तो राज्य का परिवहन उद्योग पूरी तरह ठप हो जाएगा और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ सरकार और सोई हुई व्यवस्था होगी।