Home » चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: BLO और सुपरवाइजरों को मिलेगा ₹6,000 का अतिरिक्त मानदेय
चुनाव आयोग की बड़ी सौगात: BLO और सुपरवाइजरों को मिलेगा ₹6,000 का एक्स्ट्रा मानदेय, ECI ने जारी किया आदेश !
नई दिल्ली, 14 जुलाई 2026: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) ने देश के कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम में तैनात बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) और उनके सुपरवाइजरों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है。 आयोग ने इस विशेष अभियान में उनके द्वारा किए जा रहे कठिन और महत्वपूर्ण कार्यों को देखते हुए ₹6,000 के एकमुश्त (One-time) मानदेय की मंजूरी दी है।
यह राशि अधिकारियों को मिलने वाले उनके नियमित वार्षिक पारिश्रमिक (Annual Remuneration) के अतिरिक्त दी जाएगी。
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights)
किसे मिलेगा लाभ: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्य में लगे सभी BLO और BLO सुपरवाइजरों को。
मानदेय की राशि: ₹6,000/- (एकमुश्त राशि, नियमित वार्षिक वेतन के अलावा)。
आदेश की तिथि: 14 जुलाई 2026।
किसने जारी किया आदेश: निर्वाचन आयोग के सचिव पवन दीवान (Pawan Diwan)।
इन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी हुआ पत्र
चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (No. 23/BLO/2026-ERS) के अनुसार, यह निर्देश देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भेजा गया है:
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीउ, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली (NCT), ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तराखंड।
क्यों लिया गया यह फैसला?
निर्वाचन आयोग के सचिव पवन दीवान द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में काम का वॉल्यूम (मात्रा) और उसकी प्रकृति काफी जटिल और जिम्मेदारी भरी होती है。 घर-घर जाकर डेटा सत्यापित करने और मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसी कड़ी मेहनत और समर्पण को प्रोत्साहित करने के लिए आयोग ने इस अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन को मंजूरी दी है।
आयोग ने सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस आदेश को तुरंत प्रभाव से सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों के संज्ञान में लाया जाए ताकि इसका पालन सुनिश्चित हो सके।