Home » झारखंड: राज्य सरकार के सेस से राजस्व को नुकसान, केंद्र पर ₹1.36 लाख करोड़ बकाया का दावा फर्जी – बीजेपी प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा
सेस नीति से राजस्व का घाटा, झारखंड बना अवैध खनन का चारागाह: BJP प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा
रांची: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने झारखंड की हेमंत सोरेन नीत गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य सरकार की खनन नीतियों, राजस्व प्रबंधन और अवैध खनन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण झारखंड का राजस्व लगातार गिर रहा है और राज्य अवैध खनन माफियाओं का चारागाह बन चुका है।
‘सेस लगाने से हो रहा राजस्व का भारी नुकसान’
भाजपा प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा खनिजों पर अत्यधिक सेस (उपकर) लादे जाने के कारण राज्य के राजस्व को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। अधिक सेस के चलते राज्य में खनिज आधारित उद्योगों और व्यापारियों की लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि कारोबारी अब झारखंड के बजाय पड़ोसी राज्यों से खनिजों की खरीद-बिक्री कर रहे हैं, जिससे राज्य के खजाने को मिलने वाला जायज कर और राजस्व खत्म हो रहा है।
‘केंद्र पर ₹1.36 लाख करोड़ बकाये का दावा पूरी तरह निराधार’
राज्य सरकार द्वारा लगातार केंद्र सरकार पर ₹1,36,000 करोड़ (1.36 लाख करोड़) के बकाये का आरोप लगाने पर शर्मा ने इसे राजनीतिक पैंतरा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के पास झारखंड का ₹1 भी बकाया नहीं है।
उन्होंने कहा कि अपनी असफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए राज्य सरकार बार-बार केंद्र के सिर ठीकरा फोड़ने की कोशिश करती है। संसद में भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि केंद्र के पास कोयला या अन्य राजस्व का कोई कर बकाया लंबित नहीं है।
6 वर्षों से कोयला, बालू और पत्थर की कोई आधिकारिक नीलामी नहीं
राज्य में पिछले छह सालों की स्थिति का हवाला देते हुए मृत्युंजय शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछले 6 वर्षों में राज्य सरकार ने बालू, कोयला और पत्थरों (स्टोन माइन्स) की कोई पारदर्शी या वैध नीलामी नहीं कराई है।
आधिकारिक नीलामी बंद होने के कारण एक तरफ जहां राज्य सरकार के राजस्व को सीधे तौर पर करोड़ों का चूना लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ अवैध खनन माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है।
अवैध खनन का बना ‘चारागाह’
भाजपा नेता ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा—विशेषकर कोयला, बालू और पत्थर—का रोजाना अवैध तरीके से दोहन किया जा रहा है। प्रशासनिक शह पर माफिया फल-फूल रहे हैं और राज्य प्राकृतिक संसाधनों के लूट का अड्डा यानी “चारागाह” बन चुका है।
भाजपा ने मांग की है कि राज्य सरकार बयानबाजी छोड़ खनिजों की नियमित एवं पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया शुरू करे, सेस की दरों का पुनर्मूल्यांकन करे और अवैध खनन पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करे ताकि राज्य के राजस्व की रक्षा की जा सके।
केंद्र ने झारखंड को 1 36 लाख करोड़ देने से किया इनकार
यह वीडियो केंद्र सरकार और झारखंड सरकार के बीच 1.36 लाख करोड़ रुपये के कथित कोयला बकाये पर उठे राजनीतिक विवाद और संसद में दिए गए आधिकारिक बयान को विस्तार से समझाता है।