Home » जमशेदपुर गोलीबारी: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, डीजीपी पदस्थापन और पुलिस प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
जमशेदपुर गोलीबारी: “झारखंड में डर का राज”, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना; पुलिस महकमे के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर उठाए सवाल
रांची / जमशेदपुर: जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित चर्चित उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी की घटना के बाद झारखंड की सियासत गरमा गई है। इस घटना में चार लोगों के घायल होने के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार और झारखंड पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और पहले जो दहशत केवल धनबाद तक सीमित थी, वह अब जमशेदपुर समेत राज्य के अन्य बड़े शहरों तक फैल चुकी है।
”सड़क पर कानून नहीं, डर का राज दिखाई दे रहा”
बाबूलाल मरांडी ने स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा कि आम जनता के बीच भय का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन में योग्यता और निष्पक्षता की जगह राजनीतिक वफादारी और चाटुकारिता को तवज्जो दी जा रही है।
”जब पुलिस नेतृत्व का आधार मेरिट नहीं, बल्कि सेटिंग बनेगा, तो सड़क पर कानून नहीं, बल्कि डर का राज ही दिखाई देगा। जनता अपनी जान देकर किसी भ्रष्ट या पक्षपाती व्यवस्था की कीमत नहीं चुका सकती।”
— बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री
डीजीपी पदस्थापन और अधिकारियों के अतिरिक्त प्रभार पर खड़े किए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस मुख्यालय के कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि रिटायर्ड अधिकारियों को शीर्ष पदों पर बनाए रखने से पुलिस की गरिमा को ठेस पहुंची है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और अतिरिक्त प्रभार (अतिरिक्त चार्ज) के बंटवारे पर भी सरकार को घेरा:
अतिरिक्त प्रभार का मामला: उन्होंने सवाल उठाया कि एडीजी स्तर के अधिकारी मनोज कौशिक के पास रांची जोनल आईजी का प्रभार क्यों है और रांची में डीआईजी का पद खाली क्यों रखा गया है?
मयूर पटेल का प्रभार: पुलिस मुख्यालय में प्रोविजन और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे मयूर पटेल को दुमका आईजी का पद देने के प्रशासनिक औचित्य पर भी सवाल खड़ा किया।
अन्य अधिकारियों का जिक्र: पंकज कंबोज और नरेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारियों के बीच बांटे गए अतिरिक्त प्रभार के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की।
अवैध कारोबार को संरक्षण देने के आरोपों पर मांगी निष्पक्ष जांच
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि अधिकारियों के बोकारो और धनबाद में पदस्थापन के दौरान कोयला-बालू तस्करी को संरक्षण देने तथा अवैध कमाई में हिस्सेदारी की शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई और अब तक किसी की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?
वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को दरकिनार करने का आरोप
मरांडी ने आरोप लगाया कि एक तरफ चुनिंदा अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ सक्षम अधिकारियों की अनदेखी की जा रही है:
सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी: सीआईडी में तैनात अजय लिंडा और असीम विक्रांत मिंज जैसे आदिवासी समाज से आने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की क्षमताओं का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
जांचों में बाहरी अधिकारियों की भूमिका: JPSC-JSSC और सीआईडी की बड़ी जांचों में वरिष्ठ अधिकारियों के बजाय पसंदीदा अधिकारियों को लाने के आरोप लग रहे हैं।
वेटिंग फॉर पोस्टिंग: केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे राकेश बंसल को महीनों तक पदस्थापन के इंतजार में रखने और सीबीआई का अनुभव रखने वाले माइकल राज जैसे अधिकारियों के सही उपयोग न होने पर भी जवाब मांगा।
मुख्यमंत्री से सीधे सवाल: “अपराधियों और उनके संरक्षकों पर हो कड़ी कार्रवाई”
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि केवल घटना के बाद अधिकारियों को मौके पर भेज देना ही सुशासन नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह:
घटना में शामिल अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार करे।
अपराधियों को पर्दे के पीछे से संरक्षण देने वालों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराए।
पुलिस पदस्थापन में निजी वफादारी के बजाय योग्यता, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता दे।