Home » JPSC विवाद पर कांग्रेस का पलटवार: ‘रघुवर दास पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें,
JPSC विवाद पर कांग्रेस का पलटवार: ‘रघुवर दास पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें, युवाओं को गुमराह करना बंद करे BJP’
राँची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के हालिया बयानों को पूरी तरह से राजनीतिक, भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जेपीएससी (JPSC) और राज्य की नियुक्ति प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार भाजपा अपने शासनकाल में ही खो चुकी है।
🚨 “रघुवर सरकार में भर्ती प्रक्रियाएं रहीं धांधली और भ्रष्टाचार का केंद्र”
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर सीधा प्रहार करते हुए ऋषीकेश सिंह ने कहा:
“रघुवर दास को अपने कार्यकाल की 6ठी JPSC परीक्षा का इतिहास याद रखना चाहिए। उनकी सरकार में पीटी से लेकर मेन्स तक में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे। उस दौर में योग्य छात्रों का हक मारकर प्रभावशाली नेताओं, बड़े अधिकारियों और रसूखदार परिवारों के लोगों को रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटी गईं।”
उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा के उस कुशासन में कई मामलों की कानूनी जांच हुई, अदालत में मुकदमे चले और कई जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के घेरे में आए। इतने दागदार रिकॉर्ड के बावजूद भाजपा का आज युवाओं का हितैषी बनने का ढोंग करना हास्यास्पद है।
🛡️ ‘महागठबंधन सरकार ने बनाया देश का सबसे कड़ा परीक्षा कानून, BJP ने किया विरोध’
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्य की झारखंड महागठबंधन सरकार युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कड़ा कानून: सरकार ने झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2023 लागू किया है।
कठोर सजा का प्रावधान: इस कानून के तहत पेपर लीक या भर्ती में धांधली करने वालों के लिए 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और ₹10 करोड़ तक के भारी जुर्माने की व्यवस्था है।
भाजपा का दोहरा रवैया: जब यह विधेयक विधानसभा में लाया गया, तब निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया का दावा करने वाली भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया था।
📊 “BJP शासित राज्यों में 12 साल में 152+ पेपर लीक, 7 करोड़ युवा प्रभावित”
देशभर में भर्ती परीक्षाओं की स्थिति पर आंकड़े पेश करते हुए ऋषीकेश सिंह ने भाजपा को अपने गिरेबान में झांकने की सलाह दी:
आंकड़ा / घटनाविवरण
राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीकबीते 12 वर्षों में देश में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिनसे 7 करोड़ से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
मध्य प्रदेशचर्चित व्यापम (VYAPAM) घोटाला देश के इतिहास का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला बना।
उत्तर प्रदेश व बिहारभाजपा व सहयोगी दलों के शासन वाले राज्यों में लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों परिवारों का भविष्य अंधकार में डाला।
🎯 “पारदर्शी व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई ही महागठबंधन का सिद्धांत”
ऋषीकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान महागठबंधन सरकार में जहां भी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायत मिलती है, वहां तत्काल जांच बैठाकर कार्रवाई शुरू की जाती है। यही असली पारदर्शिता का प्रमाण है।
आज झारखंड में किसी नेता की सिफारिश या पैसे के बल पर नहीं, बल्कि सामान्य और गरीब परिवारों के होनहार युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर नौकरियां मिल रही हैं।