Home » केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के 99 लाख की सब्सिडी पर बवाल: JMM प्रवक्ता खीरा लेकर बैठे; BJP को कहा ‘भारतीय घोटाला पार्टी’
केंद्रीय मंत्री की ’99 लाख की सब्सिडी’ पर थमा नहीं बवाल: JMM प्रवक्ता हाथ में खीरा लेकर बैठे, BJP को बताया ‘भारतीय घोटाला पार्टी’
रांची / नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा अपने ही मंत्रालय की योजना से करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी लेने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक घमासान में बदल चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।
इस सिलसिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद अनोखा नजारा देखने को मिला, जब JMM के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रीयो भट्टाचार्य खुद टेबल पर खीरा लेकर बैठ गए और अनोखे अंदाज में सरकार को घेरा।
🚨 JMM का बड़ा आरोप: “बीजेपी राज में अब तक हुए 24 घोटाले”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान JMM नेता सुप्रीयो भट्टाचार्य ने बीजेपी का नया नामकरण करते हुए उसे ‘भारतीय घोटाला पार्टी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:
“राम मंदिर निर्माण से लेकर तमाम बड़े घोटालों का रिकॉर्ड बनाने वाली बीजेपी के मंत्री अब गरीब किसानों का हक भी खुलेआम मार रहे हैं। जिस मंत्रालय का काम देश के अन्नदाता को मजबूत करना है, उसी मंत्रालय के रक्षक अब खुद भक्षक बन बैठे हैं।”
🥒 क्या है पूरा मामला? (The 99-Lakh Controversy)
यह पूरा विवाद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के एक कमर्शियल फार्मिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है।
सब्सीडी की रकम: करीब ₹99,03,000 (99 लाख रुपये)
किसलिए मिली सब्सिडी: राजस्थान में अपने निजी खेत पर खीरे, टमाटर और शिमला मिर्च की आधुनिक खेती (पॉलीहाउस) लगाने के लिए।
विवाद की वजह: यह सब्सिडी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत मिली है, और संयोग से भागीरथ चौधरी खुद इस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष (Ex-officio Vice-President) हैं। विपक्ष का आरोप है कि मंत्री जी खुद ही आवेदक हैं और खुद ही मंजूरी देने वाले विभाग के बॉस।
📢 मंत्री भागीरथ चौधरी की सफाई: “मैंने कुछ नहीं छिपाया, 8 साल पहले किया था अप्लाई”
चौतरफा आलोचनाओं और विपक्ष के हमलों के बाद केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इस पूरे मामले को पूरी तरह नियमों के तहत बताते हुए कहा:
किसान बैकग्राउंड: “मैं बचपन से ही एक किसान हूं और खेती मेरा पेशा है। मैंने कोई भी जानकारी छुपाई नहीं है।”
8 साल पुराना आवेदन: “मैंने इस पॉलीहाउस और सब्सिडी के लिए साल 2018 में (मंत्री बनने से बहुत पहले) अप्लाई किया था। इसकी प्रक्रिया लंबी थी जो अब पूरी हुई है।”
पारदर्शिता का दावा: “मैंने अपने फार्म पर एक बड़ा बोर्ड लगा रखा है, जिसमें लिए गए लोन और मिली सब्सिडी की पूरी जानकारी लिखी है। वहां स्थानीय अधिकारी भी आते रहते हैं और मैं दूसरे किसानों को भी वहां ट्रेनिंग देता हूँ।
📝 मुख्य बिंदु जो सोशल मीडिया पर वायरल हैं (Quick Takeaways)
पक्षमुख्य दलील / आरोप
विपक्ष (JMM / Congress)अपने ही मंत्रालय की स्कीम से इतनी बड़ी रकम लेना ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ (हितों का टकराव) है। यह किसानों के हक पर डाका है।
केंद्रीय मंत्री (BJP)एक आम किसान के नाते 2018 में आवेदन किया था। देश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेते हैं, इसमें कुछ भी अवैध नहीं है।