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जमशेदपुर/पोटका: पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत पोटका प्रखंड में इन दिनों ब्रेन मलेरिया (Cerebral Malaria) का जानलेवा तांडव देखने को मिल रहा है। कंदर गांव सहित आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है क्योंकि महज 72 घंटे के भीतर इस खतरनाक संक्रमण ने 4 मासूम बच्चों की जान ले ली है। सबसे हृदयविदारक घटना कंदर गांव के महावीर सरदार के घर की है, जिन्होंने महज कुछ ही दिनों के अंतराल में अपनी दो मासूम बेटियों (सुबोला सरदार और खुशबू सरदार) को हमेशा के लिए खो दिया।
🚨 मुख्य बिंदु: पोटका में मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात
हॉटस्पॉट बना पोटका: पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के 66 से अधिक मामले हैं, जिनमें से अकेले पोटका में संक्रमितों का आंकड़ा 40 के पार पहुंच चुका है।
72 घंटे, 4 मौतें: मरने वालों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा लक्खी सरदार (13), राहुल सरदार (8), सुबोला सरदार (8) और 1 वर्षीय मासूम खुशबू सरदार शामिल हैं।
जांच में तेजी: स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए हैं। हालिया जांच में 29 नए मरीज सामने आए हैं, जिन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए CHC और MGM अस्पताल रेफर किया गया है।
क्या होता है ब्रेन (सेरेब्रल) मलेरिया?
जब प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) से संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो यह साधारण मलेरिया की जगह दिमाग पर असर करने लगता है। दिमाग की नसों में सूजन या ब्लॉकेज होने के कारण मरीज को तेज बुखार के साथ दौरे (Fits) आने लगते हैं और समय पर सही इलाज न मिलने पर चंद घंटों में मरीज कोमा में चला जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।
🏥 क्या कर रहा है प्रशासन?
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने मानसून की दस्तक से पहले प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग (धुआं छोड़ना) और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव समय पर नहीं कराया। हालांकि, बच्चों की मौत के बाद जिला मलेरिया पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की टीम लगातार गांवों का दौरा कर रही है। इलाके में युद्धस्तर पर स्क्रीनिंग की जा रही है और अब तक 600 से अधिक ग्रामीणों की जांच की जा चुकी है।
💡 जीवन रक्षक गाइड: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आपके आस-पास या परिवार में किसी को भी नीचे दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो स्थानीय झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या जिला अस्पताल जाएं:
अत्यधिक तेज बुखार: कपकपी के साथ अचानक बहुत तेज बुखार आना।
मानसिक संतुलन बिगड़ना: बेहोशी छाना, लगातार बड़बड़ाना या सामने वाले को न पहचान पाना।
झटके या दौरे: शरीर का ऐंठना या चमकी (दौरे) आना।
लगातार उल्टी होना: कुछ भी खाने-पीने पर तेज उल्टी और अत्यधिक कमजोरी।
बचाव का सबसे बड़ा मंत्र: सोते समय अनिवार्य रूप से मच्छरदानी (Mosquito Net) का प्रयोग करें। घर के आसपास या छतों पर पुराने बर्तनों/गड्ढों में पानी जमा न होने दें। बुखार आने पर पहले 24 घंटे के भीतर ही मलेरिया की जांच सुनिश्चित करें।