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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस का बड़ा हमला; राकेश सिन्हा बोले- ‘वोट और सत्ता के बाद अब भगवान का दान भी सुरक्षित नहीं !
रांची : अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में कथित चोरी का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसने देश की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। झारखंड की राजधानी रांची में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उस पूरे नैरेटिव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जो वर्षों से भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति करती रही है।
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने इस कथित घोटाले पर तीखा तंज कसते हुए भाजपा की ‘रामभक्ति’ की नैतिकता को कटघरे में खड़ा किया है।
🚨 “जब दान सुरक्षित नहीं, तो भाजपा किस नैतिकता की बात करती है?”
राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा ने चुनाव-दर-चुनाव “जय श्रीराम” के नारे पर देश की जनता से वोट मांगे। लेकिन आज जब रामलला के चरणों में चढ़ाए गए पवित्र दान की सुरक्षा करने की बारी आई, तो भाजपा की तथाकथित रामभक्ति गायब हो गई।
“वोट चोरी, विधायक चोरी, सत्ता चोरी करने के बाद, आजाद भारत में पहली बार मंदिर में चढ़ावे की चोरी करने वाली सरकार सामने आई है। यदि भगवान के घर का चढ़ावा भी सुरक्षित नहीं है, तो भाजपा किस मुंह से नैतिकता की बात करती है?”
— राकेश सिन्हा, मीडिया प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस
❓ कांग्रेस के 3 तीखे सवाल: जवाब दे भाजपा
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्तासीन सरकार को घेरते हुए सीधे सवाल दागे हैं:
संरक्षण किसका था? देश की जनता जानना चाहती है कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद किसके संरक्षण में भगवान के दान पर हाथ साफ किया गया?
सिर्फ चुनावी पोस्टर हैं राम? क्या भाजपा के लिए भगवान श्रीराम सिर्फ चुनावी पोस्टर और रैलियों के भाषणों तक ही सीमित हैं?
जवाबदेही पर मौन क्यों? जब देश के करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले में जवाबदेही की घड़ी आई है, तो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मौन क्यों है?
⚖️ ‘राम आस्था का विषय हैं, भाजपा की जागीर नहीं’
राकेश सिन्हा ने स्पष्ट लहजे में कहा कि प्रभु श्रीराम देश के करोड़ों नागरिकों की अटूट आस्था के केंद्र हैं, वे किसी पार्टी की राजनीतिक जागीर नहीं हैं। जो लोग हर छोटे-बड़े मुद्दे पर दूसरों को धर्म का प्रमाणपत्र बांटते फिरते हैं, उन्हें सबसे पहले रामलला के चढ़ावे में हुई इस कथित चोरी का हिसाब देना चाहिए।
📌 कांग्रेस की मुख्य मांगें:
निष्पक्ष और समयबद्ध जांच: इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
त्वरित गिरफ्तारी: घटना में शामिल सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
राजनीतिक संरक्षण का पर्दाफाश: सरकार यह साफ करे कि श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वाले इन सफेदपोश अपराधियों को किसका राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था।
आर्टिकल का मुख्य टेकअवे (Focus Point): “जो पार्टी खुद को रामभक्त कहती है, उसके शासन में रामलला का चढ़ावा भी सुरक्षित नहीं रहा। भाजपा को अब भाषण नहीं, जवाब देना होगा। राम के नाम पर राजनीति बहुत हो चुकी, अब राम के नाम पर हुई कथित लूट का हिसाब दीजिए।”
इस विषय पर नेशनल मीडिया में चल रही राजनीतिक बहस और एसआईटी (SIT) की कार्रवाई से जुड़ी जमीनी रिपोर्ट को समझने के लिए आप राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हुई FIR पर विपक्ष के सवाल इस वीडियो क्लिप को देख सकते हैं, जिसमें जांच के विवरण और राजनीतिक दलों के बीच चल रहे इस पूरे विवाद को विस्तार से दिखाया गया है।