Home » जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का छापा: सत्ता के रसूख से मुकदमों के भंवर तक, आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के ‘अर्श से फर्श’ की कहानी
जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का छापा: सत्ता के रसूख से मुकदमों के भंवर तक, आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के ‘अर्श से फर्श’ की पूरी कहानी !
रामपुर/नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आजम खान और उनके मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली स्थित लगभग 10 ठिकानों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ताबड़तोड़ छापेमारी की है। जांच एजेंसियों का सीधा निशाना आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी’ और उससे जुड़ा वित्तीय लेनदेन है।
कभी रामपुर की सत्ता की धुरी रही यह यूनिवर्सिटी कैसे एक ड्रीम प्रोजेक्ट से विवादों का सबसे बड़ा केंद्र बन गई? जानिए इसके अर्श से फर्श तक पहुंचने की पूरी कहानी।
अर्श का दौर: जब एक ‘सपना’ बना राजकीय शान
2006 में रखी गई नींव: आजम खान ने रामपुर को एक बड़ा एजुकेशनल हब बनाने के मकसद से 2006 में ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की।
500 एकड़ में फैला आलीशान कैंपस: कोसी नदी के किनारे लगभग 500 एकड़ से अधिक जमीन पर यूनिवर्सिटी का भव्य ढांचा खड़ा किया गया। इसमें मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग फैकल्टी और अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर शामिल किए गए।
सपा सरकार में असीमित अधिकार: 2012 से 2017 के दौरान जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब आजम खान नगर विकास मंत्री थे। उस दौर में इस प्रोजेक्ट को सरकारी संसाधनों, अनुदानों और तेजी से मिली मंजूरियों का पूरा फायदा मिला। आजम खान खुद जीवनभर के लिए इसके आजीवन चांसलर बने।
विवादों की शुरुआत: जब नियमों की उड़ी धज्जियां
जैसे-जैसे यूनिवर्सिटी का ढांचा बढ़ा, वैसे-वैसे विवाद भी गहराते गए। आरोप लगे कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए:
किसानों की जमीनों पर कब्जा: आरोप है कि गरीब किसानों की जमीनें जबरन कब्जाई गईं या नाममात्र दामों पर ली गईं।
सरकारी और शत्रु संपत्ति का इस्तेमाल: यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर सरकारी चकरोड, नदियां और ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) की जमीनों को मिलाने का गंभीर आरोप लगा।
सरकारी ठेकों के फंड का डायवर्जन: ताजा ED जांच के मुताबिक, आरोप है कि सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम को प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के माध्यम से यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के एसेट बनाने और भारी डोनेशन के रूप में डायवर्ट किया गया।
फर्श का सफर: 2017 के बाद कैसे पलट गया पासा?
2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद आजम खान और उनकी जौहर यूनिवर्सिटी पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ:
सौ से अधिक प्राथमिकी (FIRs): किसानों की जमीन हड़पने, बिजली चोरी, किताबों की चोरी और शत्रु संपत्ति पर कब्जे को लेकर आजम खान पर 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए।
जेल की सलाखों के पीछे: दर्जनों मामलों में मुकदमों के चलते आजम खान, उनकी पत्नी तज़ीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल तक जाना पड़ा।
सरकारी कब्जे और जमीन की वापसी: शासन-प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी परिसर में बनी सरकारी संपत्तियों को खाली कराया, चकरोड की जमीनों को अपने कब्जे में लिया और शत्रु संपत्ति वाले हिस्सों को सील किया।
IT और ED का शिकंजा: साल 2023 में जहां आयकर विभाग (Income Tax) ने आजम खान के ठिकानों पर लंबी छापेमारी की थी, वहीं अब ED ने वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जांच तेज कर दी है।
वर्तमान स्थिति: क्या है ED की कार्रवाई का मुख्य आधार?
ED की लखनऊ जोनल टीम की जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि सरकारी ठेकों के जरिए जो पैसा निजी ठेकेदारों के पास गया, उसे दान (Donations) या निर्माण कार्यों के नाम पर वापस जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट की संपत्तियां बनाने में तो नहीं खपाया गया।
कभी सत्ता के रसूख और शान-ओ-शौकत का प्रतीक रही जौहर यूनिवर्सिटी आज केवल अदालती कार्यवाहियों, कुर्की के नोटिसों और केंद्रीय जांच एजेंसियों की छापेमारी की वजह से सुर्खियों में है। आजम खान का यह ड्रीम प्रोजेक्ट आज राजनीति, कानून और जांच एजेंसियों के त्रिकोण में फंसा हुआ है।