Home » पटना में तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च: छात्रों पर लाठीचार्ज और AK-47 फायरिंग के विरोध में सड़क पर उतरे कार्यकर्ता, पुलिस ने चलाया वॉटर कैनन
बिहार में राजनीतिक घमासान: छात्रों पर लाठीचार्ज और AK-47 चलाने के विरोध में सड़क पर उतरे तेजस्वी यादव, पुलिस ने किया वॉटर कैनन का इस्तेमाल !
पटना: बिहार में पेपर लीक, छात्रों पर लाठीचार्ज और सीवान में हुए आंदोलन के दौरान कथित तौर पर AK-47 से फायरिंग की घटना के विरोध में राजधानी पटना की सड़कें जंग का मैदान बन गईं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के हजारों कार्यकर्ता बुधवार को राजभवन घेराव के लिए सड़कों पर उतर आए।
गांधी मैदान स्थित जेपी गोलंबर से शुरू हुआ यह विशाल ‘राजभवन मार्च’ जैसे ही शहर के प्रमुख चौराहे आयकर गोलंबर पहुंचा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।
आयकर गोलंबर पर भारी बवाल, पुलिस ने दागी पानी की बौछारें
राजभवन की ओर बढ़ रहे विशाल जनसैलाब को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। चौराहे पर की गई भारी बैरिकेडिंग को तोड़कर जब आरजेडी कार्यकर्ता आगे बढ़ने लगे, तब पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन (Water Cannon) की बौछारों का इस्तेमाल किया।
हंगामे और गहमागहमी के बीच पटना पुलिस ने तेजस्वी यादव को हिरासत में ले लिया और उन्हें गाड़ी में बैठाकर पुलिस लाइन ले गई। इस दौरान पुलिस बल और आरजेडी समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।
“निहत्थे छात्रों पर AK-47 चलाने का आदेश किसने दिया?” — तेजस्वी यादव
मार्च की शुरुआत में तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा:
“बिहार की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। राज्य का कोई ऐसा एग्जाम नहीं है जिसका पेपर लीक न होता हो। जब हमारे छात्र और युवा अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं और AK-47 से गोलियां चलाई जाती हैं। हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि निहत्थे छात्रों पर स्वचालित हथियारों से गोली चलाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था?”
हाथों में तिरंगा और AK-47 के पोस्टर लेकर पहुंचे कार्यकर्ता
प्रदर्शन के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला। आरजेडी कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और पुलिसिया कार्रवाई का विरोध दर्ज कराने के लिए AK-47 के प्रतीक चिन्ह और पोस्टर लेकर पहुंचे थे। पूरे मार्च के दौरान सरकार विरोधी नारेबाजी होती रही।
प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पटना के गांधी मैदान से सचिवालय तक 500 से अधिक जवानों की तैनाती की थी और शहर के कई प्रमुख रास्तों का ट्रैफिक डायवर्ट किया गया था।