Home » नालंदा मिड-डे मील हादसा: बच्चों ने मांगा नमक तो परोस दिया सर्फ, 25 से अधिक बच्चे अस्पताल में भर्ती !
नालंदा में मिड-डे मील में बड़ी लापरवाही: बच्चों ने माँगा नमक तो सब्जी में डाल दिया सर्फ, 25 से ज्यादा बच्चे बीमार !
बिहारशरीफ (नालंदा): बिहार के नालंदा जिले से सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। नूरसराय थाना क्षेत्र स्थित मध्य विद्यालय, परासी में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के दौरान 25 से अधिक बच्चे अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए।
आरोप है कि भोजन के दौरान बच्चों द्वारा सब्जी में नमक कम होने की बात कहने पर उन्हें नमक की जगह गलती से कपड़ा धोने वाला सर्फ (डिटर्जेंट) परोस दिया गया। सर्फ युक्त खाना खाते ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिससे स्कूल से लेकर अस्पताल तक हड़कंप मच गया।
कैसे घटी यह दर्दनाक घटना?
विद्यालय के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, मंगलवार को मेनू के मुताबिक बच्चों को सोयाबीन की सब्जी और चावल परोसा गया था।
नमक की मांग: भोजन के दौरान बच्चों ने शिकायत की कि सब्जी में नमक कम है।
लापरवाही का आलम: रसोईघर में नमक और सर्फ के डिब्बे पास-पास रखे हुए थे। रसोइया ने ध्यान दिए बिना नमक के धोखे में डिब्बे से सर्फ निकालकर बच्चों की थाली में डाल दिया।
शुरू हुई उल्टी और चक्कर: सर्फ मिला खाना खाते ही बच्चों का गला और पेट में दर्द शुरू हो गया, जिसके बाद उन्हें उल्टी और चक्कर आने लगे।
अस्पताल में अफरा-तफरी, परिजनों का हंगामा
बच्चों की तबीयत बिगड़ते ही स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन हालत में सुधार न होने पर तुरंत बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेजा गया।
परिजनों का गुस्सा: घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। अस्पताल पहुंचने पर एक ही बेड पर दो-तीन बच्चों का इलाज देखकर परिजन भड़क गए और स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर हंगामा किया।
एंबुलेंस की अनुपलब्धता: परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि आपात स्थिति के बावजूद समय पर एंबुलेंस नहीं मिली, जिससे बच्चों को टोटो और टेंपो में लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
प्रशासनिक रुख और स्थिति की सूचना मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों की टीम को इलाज में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया। सिविल सर्जन का बयान: “सभी बच्चों का गहन निगरानी में इलाज चल रहा है। समय रहते अस्पताल लाए जाने के कारण सभी बच्चे सुरक्षित और खतरे से बाहर हैं।”प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और भोजन के सैंपल को लैब टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। दोषी कर्मचारियों और संस्था पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।