Home » रांची रेलवे स्टेशन पर बदहाली: फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम से लेकर स्वचालित सीढ़ी तक सब बेहाल, यात्री परेशान
रांची रेलवे स्टेशन पर दावों की खुली पोल: फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम बेहाल, स्वचालित सीढ़ियां खराब और पीने के पानी की भारी किल्लत !
ग्राउंड रिपोर्ट: ‘अमृत भारत’ के दौर में बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे रांची के यात्री, बुजुर्गों और महिलाओं की बढ़ीं मुश्किलें।
रांची: राजधानी का रांची रेलवे स्टेशन इन दिनों अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि यहां आने वाले यात्री बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं। वीआईपी और फर्स्ट क्लास का टिकट लेकर सफर करने वाले साथियों से लेकर आम यात्रियों तक, हर कोई स्टेशन प्रबंधन की लापरवाही का शिकार हो रहा है।
⚡ न्यूज़ हाइलाइट्स (Quick Read)
फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम: वीआईपी पैसेंजर्स के लिए बने इस कमरे की हालत खराब है, न एसी ठीक से काम कर रहा है और न बैठने की सही व्यवस्था है।
खराब स्वचालित सीढ़ी (Escalator): प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 5 पर लगी एस्केलेटर अक्सर बंद रहने से बुजुर्गों और भारी सामान वाले यात्रियों को सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं।
शौचालय की बदबू: वेटिंग रूम और प्लेटफॉर्म्स के शौचालयों की सफाई न होने से स्टेशन पर सांस लेना दूभर है।
पानी की किल्लत: इस भीषण मौसम में यात्रियों के लिए ठंडे और साफ पीने के पानी की भारी कमी देखी जा रही है।
बदहाल फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम: पैसे पूरे, सुविधाएं अधूरी
स्टेशन के फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम का हाल सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है। अतिरिक्त किराया चुका कर आने वाले यात्रियों को यहां न तो चैन की सांस मिल रही है और न ही आराम। वेटिंग रूम के सोफे फटे हुए हैं, वेंटिलेशन खराब है, और रख-रखाव के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है। यात्रियों का कहना है कि फर्स्ट क्लास और जनरल वेटिंग रूम का फर्क अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
बंद पड़ा एस्केलेटर: बुजुर्ग और मरीज बेहाल
स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर लगी स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) सफेद हाथी साबित हो रही हैं। आए दिन एस्केलेटर के बंद रहने से सबसे ज्यादा परेशानी वरिष्ठ नागरिकों, मरीजों और छोटे बच्चों के साथ सफर कर रही महिलाओं को हो रही है। भारी-भरकम सूटकेस उठाकर ऊंची सीढ़ियां चढ़ना यात्रियों के लिए किसी सजा से कम नहीं है।
शौचालय में गंदगी का अंबार और पानी की बूंद-बूंद को तरसते लोग
स्टेशन परिसर और वेटिंग रूम के भीतर बने शौचालयों की स्थिति बेहद नारकीय है। नियमित सफाई न होने के कारण वहां से उठने वाली बदबू के चलते लोग उसके पास खड़े होने से भी कतराते हैं। इसके अलावा, वाटर बूथों पर पीने के साफ पानी की भारी किल्लत है। यात्रियों को मजबूरी में महंगे दामों पर पैकेज्ड वाटर बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
यात्रियों ने क्या कहा?
”हम फर्स्ट क्लास का टिकट इसलिए लेते हैं ताकि यात्रा सुकून भरी हो। लेकिन रांची स्टेशन के वेटिंग रूम में बैठना भी मुश्किल है। शौचालय इतने गंदे हैं कि आप अंदर पैर नहीं रख सकते।”
— अमित कुमार, यात्री (दिल्ली जाने वाले)
”मेरे घुटनों में दर्द है, यह सोचकर आई थी कि स्वचालित सीढ़ी से चली जाऊंगी। लेकिन यहाँ आकर पता चला कि एस्केलेटर कई दिनों से खराब पड़ा है। रेलवे प्रशासन को आम जनता की तकलीफ क्यों नहीं दिखती?”
— शारदा देवी, बुजुर्ग यात्री
प्रशासन का रुख: इस मामले में जब स्थानीय रेलवे अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने हमेशा की तरह जल्द ही मेंटेनेंस का काम पूरा कर स्थिति सुधारने का रटा-रटाया आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक यात्री इन बुनियादी दिक्कतों को झेलने के लिए मजबूर रहेंगे?