Home » रांची के नामकुम में बड़ा फर्जीवाड़ा: मृत व्यक्ति के नाम कर दिया 1.39 एकड़ जमीन का म्यूटेशन, CO दफ्तर पर उठे सवाल !
रांची के नामकुम में अजब-गजब फर्जीवाड़ा: 2024 में हुई मौत, 2025 में ‘मुर्दा’ के नाम पर CO दफ्तर ने कर दिया जमीन का म्यूटेशन
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम अंचल कार्यालय से जमीन की दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां अंचल कार्यालय की कार्यशैली और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिस व्यक्ति की मौत साल 2024 में ही हो चुकी थी, उसे 2025 में कागजों पर ‘जिंदा’ दिखाकर लगभग 1.39 एकड़ जमीन का मालिक बना दिया गया।
नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र से भी व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अंचल कार्यालय (CO Office) ने उसके नाम पर जमीन का म्यूटेशन स्वीकृत कर दिया।
तीन बार खारिज हुआ आवेदन, चौथी बार में कैसे मिला अप्रूवल?
पीड़ित पक्ष का कहना है कि इसी जमीन के दाखिल-खारिज के लिए पहले भी तीन बार आवेदन किया गया था। अंचल कार्यालय ने हर बार गड़बड़ी पाते हुए आवेदन को खारिज कर दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि चौथी बार में बिना किसी ठोस सत्यापन के मृत व्यक्ति के नाम पर ही म्यूटेशन पास कर दिया गया।
बिना हस्ताक्षर वाले शपथ पत्र पर मेहरबानी
मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जिस शपथ पत्र (Affidavit) के आधार पर म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की गई, उसमें शपथ लेने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं हैं। बिना हस्ताक्षर वाले फर्जी दस्तावेज के आधार पर इतना बड़ा फैसला कैसे ले लिया गया, यह अंचल कार्यालय की साठगांठ की ओर इशारा कर रहा है।
पीड़ित महिला ने लगाई न्याय की गुहार
हेथू गांव की रहने वाली सुशीला देवी ने आरोप लगाया है कि उनकी लगभग 1 एकड़ 39 डिसमिल जमीन पर भू-माफिया कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही पीड़ित पक्ष ने सख्त रुख अपनाया है:
प्रशासनिक शिकायत: मामले की शिकायत स्थानीय थाना, रांची एसएसपी (SSP), रांची डीसी (DC) और एलआरडीसी (LRDC) कार्यालय में दर्ज कराई गई है।
रद्द करने की अपील: फर्जी म्यूटेशन को तुरंत रद्द करने के लिए एलआरडीसी (LRDC) कोर्ट में अपील याचिका दाखिल की गई है।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नामकुम अंचल कार्यालय की भूमिका संदेह के घेरे में है:
जब व्यक्ति की मौत 31 अगस्त 2024 को हो चुकी थी, तो 2025 में उसके नाम पर आवेदन कैसे स्वीकार हुआ?
तीन बार निरस्त हो चुके आवेदन को चौथी बार किस नियम के तहत मंजूरी दी गई?
बिना हस्ताक्षर वाले हलफनामे को जांच अधिकारी और CO दफ्तर ने हरी झंडी कैसे दे दी?
फिलहाल, पीड़ित परिवार जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।