Home » रांची वंदे भारत ट्रेन उद्घाटन खर्च: 3 ट्रेनों की शुरुआत में रेलवे ने कितने करोड़ किए खर्च ? जानें सच!
🛑 रांची वंदे भारत खर्च: 3 सुपरफास्ट ट्रेनों के उद्घाटन और निर्माण पर कितना हुआ खर्च? जानें क्या कहता है रेलवे का आंकड़ा !
रांची डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची को अब तक तीन प्रीमियम वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है। रांची-पटना, रांची-हावड़ा और रांची-वाराणसी रूट्स पर दौड़ने वाली ये ट्रेनें जहां यात्रियों का समय बचा रही हैं, वहीं इनके उद्घाटन और भव्य आयोजनों पर होने वाले खर्च को लेकर भी जनता के बीच काफी उत्सुकता है।
क्या आप जानते हैं कि रांची में इन तीनों ट्रेनों को पटरी पर उतारने और इनके उद्घाटन समारोहों को आयोजित करने में कुल कितना पैसा लगा है? आइए समझते हैं रेलवे के इनसाइड आंकड़े और आरटीआई (RTI) से सामने आई हकीकत।
💰 ₹345 करोड़ की तो सिर्फ ट्रेनें हैं: मैन्युफैक्चरिंग का गणित
वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक और सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन को ट्रैक पर उतारने की सबसे बड़ी लागत उसकी मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) में आती है।
लागत का गणित: भारतीय रेलवे के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) चेन्नई के अनुसार, एक मानक 16 कोच वाली सेकंड-जनरेशन वंदे भारत ट्रेन (Vande Bharat Rake) को तैयार करने में लगभग ₹115 करोड़ का खर्च आता है।
रांची मंडल को मिली तीनों ट्रेनों के निर्माण की कुल अनुमानित लागत इस प्रकार है:
ट्रेन रूटकोच संख्यानिर्माण लागत (अनुमानित)
1. रांची – पटना वंदे भारत (झारखंड की पहली)8/16 कोच₹100 – ₹115 करोड़
2. रांची – हावड़ा वंदे भारत8 कोच~ ₹70-80 करोड़ (शुरुआती सेट)
3. रांची – वाराणसी वंदे भारत8 कोच~ ₹80 करोड़
कुल ट्रेन एसेट वैल्यू—लगभग ₹250 से ₹300+ करोड़
🎪 उद्घाटन समारोह (Inaugural Event) पर कितना हुआ खर्च?
रांची में तीनों ट्रेनों के उद्घाटन अलग-अलग चरणों में हुए हैं। रेलवे और सरकार की तरफ से केवल रांची के विशिष्ट उद्घाटन कार्यक्रमों (जैसे टेंट, पंडाल, सुरक्षा, साउंड सिस्टम) का कोई अलग से संकलित ‘इवेंट बिल’ आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है। लेकिन देश के अन्य हिस्सों में आए RTI (सूचना का अधिकार) के जवाबों से इसका एक सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है।
देशभर में वंदे भारत के बड़े उद्घाटन समारोहों पर रेलवे का खर्च कुछ इस तरह रहा है:
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वर्चुअल और लोकल इवेंट्स: कई रूट्स पर जब पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक साथ कई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई, तो स्थानीय स्टेशनों पर भव्य वाटरप्रूफ पंडाल, वीआईपी सिटिंग, डेकोरेशन और लाइटिंग के लिए प्रति स्टेशन ₹30 लाख से ₹50 लाख+ का बजट खर्च हुआ।
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एकल बड़े उद्घाटन: देश के कुछ चुनिंदा रूट्स (जैसे पुरी-हावड़ा या चेन्नई-कोयंबटूर) पर इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों और ब्रांडिंग पर ₹1.14 करोड़ से ₹2.5 करोड़ तक खर्च होने की पुष्टि आरटीआई के जरिए हो चुकी है।
चूंकि रांची की ट्रेनों का शुभारंभ भी इसी तरह के संयुक्त बड़े राष्ट्रीय डिजिटल आयोजनों और कुछ ऑन-ग्राउंड फंक्शन्स के मिश्रण के साथ हुआ था, इसलिए अनुमान है कि रांची रेल मंडल और स्थानीय स्तर पर तीनों आयोजनों को मिलाकर ₹1.5 करोड़ से ₹2.5 करोड़ के बीच का कुल इवेंट मैनेजमेंट खर्च आया होगा।
🔥 निष्कर्ष: यह खर्च फिजूलखर्ची है या निवेश?
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत जैसी वीआईपी ट्रेनों के उद्घाटन समारोहों को एक उत्सव की तरह पेश किया जाता है ताकि ‘मेक इन इंडिया’ और आधुनिक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक प्रचार हो सके। हालांकि इवेंट्स पर होने वाले लाखों-करोड़ों के खर्च पर समय-समय पर राजनीतिक बहस भी होती है, लेकिन दूसरी तरफ ये ट्रेनें हर महीने रेलवे को करोड़ों रुपये का रेवेन्यू (राजस्व) कमा कर दे रही हैं।
रांची रेल मंडल के लिए ये तीनों ट्रेनें कमाई और कनेक्टिविटी, दोनों के लिहाज से एक गेम-चेंजर साबित हुई हैं।