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रांची में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आगाज: संत अन्ना स्कूल से सिविल सर्जन ने बच्चों को दवा खिलाकर की शुरुआत; 4.84 लाख बच्चों का लक्ष्य
1 से 19 वर्ष के बच्चों को दी जा रही है एल्बेंडाजोल की गोली; छूटे हुए बच्चों को 18 जून को मॉप-अप दिवस पर मिलेगी दवा
रांची, 15 जून 2026:
रांची जिले में बच्चों को सेहतमंद और कृमि मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस’ अभियान का शानदार आगाज हो चुका है। सोमवार को संत अन्ना स्कूल, रांची में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बच्चों को खुद अपने हाथों से कृमिनाशक दवा (एल्बेंडाजोल) खिलाकर इस जिलाव्यापी अभियान का शुभारंभ किया।
इस विशेष मौके पर स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य पदाधिकारी (DRCHO) डॉ. असीम कुमार मांझी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रीति चौधरी और विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सेलिन बाड़ा (Celine Bara) सहित कई शिक्षिकाएं शामिल थीं।
📊 रांची जिले का लक्ष्य: एक नजर में
अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पुख्ता तैयारी की है। जिले के आंकड़े और नियम कुछ इस प्रकार हैं:
मुख्य बिंदु
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विवरण
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कुल लक्षित बच्चे
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4,84,435 (चार लाख चौरासी हजार चार सौ पैंतीस)
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आयु वर्ग
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1 वर्ष से 19 वर्ष तक के सभी बच्चे और किशोर-किशोरी
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वितरण केंद्र
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सभी सरकारी व निजी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र
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दवा खिलाने का तरीका
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स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में चबाकर या मसलकर पानी के साथ
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किन्हें नहीं देनी है दवा
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गंभीर रूप से बीमार बच्चे और गर्भवती महिलाएं
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💡 छूटे हुए बच्चों के लिए ‘मॉप-अप दिवस’ 18 जून को
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि जो बच्चे किसी भी कारणवश आज (15 जून को) दवा लेने से वंचित रह गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे सभी बच्चों को 18 जून 2026 को आयोजित होने वाले ‘मॉप-अप दिवस’ पर स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में एल्बेंडाजोल की दवा निश्चित रूप से खिलाई जाएगी।
🧠 कृमि मुक्त होना क्यों है जरूरी?
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि,
“कृमि (Pet के कीड़े) संक्रमण बच्चों के स्वास्थ्य, उनके पोषण स्तर और शारीरिक व मानसिक विकास पर बेहद बुरा असर डालता है। एल्बेंडाजोल की गोली इस संक्रमण को रोकने में पूरी तरह प्रभावी है। बच्चों के बेहतर भविष्य और उनके समुचित विकास के लिए यह दवा बेहद जरूरी है।”
🚫 सेहत के साथ-साथ ‘नो टू ड्रग्स’ का संदेश
दवा खिलाने के साथ-साथ सिविल सर्जन ने बच्चों को जीवन में सही राह चुनने की सीख भी दी। उन्होंने युवाओं और बच्चों को नशे की लत से दूर रहने की सख्त सलाह दी। डॉ. कुमार ने तंबाकू और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से शरीर पर पड़ने वाले जानलेवा दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए कहा कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देता है।
🌱 पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज पर भी की चर्चा
इस दौरान डॉ. प्रभात कुमार ने एक जिम्मेदार नागरिक की तरह बच्चों से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरों पर भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि बढ़ता प्रदूषण और अनियमित मौसम हमारे स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। सिविल सर्जन ने बच्चों से अपील की कि वे अपने जीवन में अधिक से अधिक पेड़ लगाएं, पर्यावरण का संरक्षण करें और अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखें ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और सुरक्षित कल मिल सके।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का अंतिम उद्देश्य 1 से 19 वर्ष के सभी बच्चों व किशोरों को कृमि मुक्त करना है। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार होगा, बल्कि उनके मानसिक विकास और स्कूल में उनके शैक्षणिक प्रदर्शन (Academic Performance) में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।