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Home » वसुधैव कुटुंबकम की भावना का प्रतीक भारत, अंतराष्ट्रीय वकील सम्मेलन में सम्मिलित भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वी चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून मंत्री तथा सहयोगी अर्जुन राम मेघवाल।

वसुधैव कुटुंबकम की भावना का प्रतीक भारत, अंतराष्ट्रीय वकील सम्मेलन में सम्मिलित भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वी चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून मंत्री तथा सहयोगी अर्जुन राम मेघवाल।

बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया की ओर से अंतरराष्ट्रीय वकील सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

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3 years ago
in करियर, देश, नई दिल्ली, न्यू दिल्ली, विदेश
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वसुधैव  कुटुंबकम की भावना का प्रतीक भारत, अंतराष्ट्रीय वकील सम्मेलन में सम्मिलित भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वी चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून मंत्री तथा सहयोगी अर्जुन राम मेघवाल।
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नई दिल्ली : भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वी. चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून मंत्री और सहयोगी अर्जुन  राम मेघवाल मौजूद थे। ब्रिटेन के लॉर्ड चांसलर  एलेक्स चाक, अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, और सुप्रीम कोर्ट के सभी सम्मानित न्यायाधीश, बार काउंसिल के अध्यक्ष और सदस्य, विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, राज्यों के प्रतिनिधि, और सम्मानित देवियों – सज्जनों। दुनिया भर की कानूनी बिरादरी की प्रसिद्ध हस्तियों से मिलना और उनकी उपस्थिति थे।  भारत के कोने-कोने से लोग सम्मेलन का हिस्सा बनने आए थे। इस सम्मेलन में इंग्लैंड के लॉर्ड चांसलर और इंग्लैंड के बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजुद रहे । राष्ट्रमंडल और अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि भी भाग लिया । एक प्रकार से यह अंतर्राष्ट्रीय वकील सम्मेलन भारत की वसुधैव कुटुंबकम की भावना का प्रतीक बन गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया को विशेष बधाई जो इस कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी पूरे दिल से निभा रहा है। 

किसी भी देश की कानूनी बिरादरी उसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में वर्षों से, न्यायपालिका और बार देश में कानूनी व्यवस्था के संरक्षक रहे हैं। अभी कुछ समय पहले भारत ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाया और आजादी की इस लड़ाई में कानूनी पेशेवरों ने अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के संघर्ष में, कई वकीलों ने राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी कानूनी प्रैक्टिस छोड़ दी। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, हमारे संविधान के मुख्य वास्तुकार बाबा साहेब अम्बेडकर, देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और आजादी के समय कई अन्य महान हस्तियां खुद वकील थे चाहे वह लोकमान्य तिलक हों या वीर सावरकर। इसका मतलब यह है कि कानूनी पेशेवरों के अनुभव ने स्वतंत्र भारत की नींव को मजबूत किया और आज, जैसे-जैसे दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ रहा है, भारत की निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय व्यवस्था भी उस भरोसे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह बना है। एक दिन पहले ही देश की संसद ने लोकसभा और विधानसभाओं (राज्य विधानसभाओं) दोनों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का कानून पारित किया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक नई दिशा तय करेगा और भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास में नई ऊर्जा लाएगा।

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यह सम्मलेन  ऐतिहासिक G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया ने भारतीय लोकतंत्र, जनसांख्यिकी तथा कूटनीति की झलक देखी। एक महीने पहले, भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इन उपलब्धियों से आत्मविश्वास से भरपूर, भारत 2047 तक एक विकसित देश के अपने लक्ष्य की दिशा में लगन से काम कर रहा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, भारत को निस्संदेह अपनी नींव के रूप में एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली की आवश्यकता है।  अंतर्राष्ट्रीय वकील सम्मेलन इस दिशा में भारत के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा साथ ही इस सम्मेलन के दौरान सभी देश एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकते हैं।

21वीं सदी में, हम गहराई से जुड़े हुए विश्व में रहते हैं। प्रत्येक कानूनी दिमाग या संस्था अपने अधिकार क्षेत्र के प्रति अत्यधिक सतर्क रहती है। हालांकि ऐसी कई ताकतें हैं जिनके खिलाफ अब भी  लड़ रहे हैं जिन्हें सीमाओं या अधिकार क्षेत्र की परवाह नहीं है। और जब खतरे वैश्विक हों तो उनसे निपटने का नजरिया भी वैश्विक होना चाहिए। चाहे वह साइबर आतंकवाद हो, मनी लॉन्ड्रिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो, या इसका दुरुपयोग हो, ऐसे कई मुद्दे हैं जहां सहयोग के लिए वैश्विक ढांचे की आवश्यकता होती है। यह महज किसी एक सरकार या प्रशासन का मामला नहीं है बल्कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए, विभिन्न देशों के कानूनी ढांचे को एक साथ आने की जरूरत है, जैसे हवाई यातायात नियंत्रण के लिए सहयोग करते हैं। कोई नहीं कहता, “तुम्हारे कानून तुम्हारे हैं, और मेरे कानून मेरे हैं, और मुझे इसकी परवाह नहीं है। उस स्थिति में, कोई भी विमान कहीं भी नहीं उतरेगा। हर कोई सामान्य नियमों और विनियमों, प्रोटोकॉल का पालन करता है। उसी तरह, हमें चाहिए विभिन्न क्षेत्रों में एक वैश्विक ढांचा स्थापित करने के लिए। अंतर्राष्ट्रीय वकीलों के सम्मेलन को निस्संदेह इस दिशा में गहराई से जाना चाहिए और दुनिया को एक नई दिशा देनी चाहिए।

इस सम्मेलन में चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) है, जैसा कि तुषार ने विस्तार से बताया है। साथ ही वाणिज्यिक लेनदेन की जटिलता भी बढ़ रही है। एडीआर दुनिया भर में गति पकड़ रहा है।  इस विषय पर व्यापक रूप से चर्चा होगी। भारत में सदियों से विवादों को पंचायत के माध्यम से सुलझाने की परंपरा रही है, ये हमारी संस्कृति में रची-बसी है। भारत सरकार ने इस अनौपचारिक प्रणाली को औपचारिक बनाने के लिए मध्यस्थता अधिनियम भी बनाया है। इसके अतिरिक्त, भारत में लोक अदालतों की प्रणाली विवादों को सुलझाने का एक महत्वपूर्ण साधन रही है। पीएम ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान की बात याद आती है। न्याय मिलने तक एक मामले को सुलझाने की औसत लागत केवल 35 पैसे थी। यह व्यवस्था हमारे देश में प्रचलित है। पिछले छह वर्षों में लोक अदालतों में लगभग 7 लाख मामलों का निपटारा किया गया है।

न्याय वितरण का एक और महत्वपूर्ण पहलू, जिस पर अक्सर पर्याप्त चर्चा नहीं की जाती, वह है भाषा और कानून की सरलता। कानून को दो तरह से प्रस्तुत करने पर भी विचार कर रहे हैं: एक उस भाषा में जिससे आप सभी परिचित हैं, और दूसरी उस भाषा में जिसे हमारे देश का सामान्य व्यक्ति भी समझ सके। एक सामान्य व्यक्ति को भी कानून को अपना मानना चाहिए।  सिस्टम एक ही ढाँचे में रच-बस गया है, फिर भी इसे सुधारने में कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा लेकिन, मेरे पास समय है और मैं इस पर काम करना जारी रखूंगा। जिस भाषा में कानून लिखे जाते हैं और जिस भाषा में अदालती कार्यवाही होती है वह न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पहले किसी भी कानून का मसौदा तैयार करना बहुत जटिल हुआ करता था। एक सरकार के रूप में, जैसा कि मैंने पहले कहा, हम इसे यथासंभव सरल बनाने और देश की अधिक से अधिक भाषाओं में इसे उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। हम ईमानदारी से उस दिशा में काम कर रहे हैं।’

आपने डेटा प्रोटेक्शन कानून  उसमें सरलीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और उन परिभाषाओं से सामान्य व्यक्ति को सुविधा होगी।  यह देश की न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।’ मैंने एक बार सार्वजनिक रूप से न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ जी की सराहना की थी क्योंकि उन्होंने कहा था कि अब से, अदालत के फैसले का ऑपरेटिव हिस्सा वादी की भाषा में उपलब्ध कराया जाएगा। इस छोटे से कदम के लिए भी 75 साल लग गए और मुझे भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का कई स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए भी बधाई के पत्र है। इससे देश के आम लोगों को काफी मदद मिलेगी। अगर डॉक्टर अपने मरीज से उसकी भाषा में बात करे तो आधी बीमारी ठीक हो जाती है तथा यहां समान प्रगति करनी है।

टेक्नोलॉजी के माध्यम से कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम करना चाहिए। सुधार, और नई न्यायिक प्रथाएं। तकनीकी प्रगति ने न्यायपालिका प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं। वास्तव में, तकनीकी प्रगति ने व्यापार, निवेश और वाणिज्य क्षेत्रों को जबरदस्त बढ़ावा दिया है। इसलिए, कानूनी पेशे से जुड़े व्यक्तियों को भी इन तकनीकी सुधारों को अपनाना चाहिए। निसंदेह अंतर्राष्ट्रीय वकील सम्मेलन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दुनिया भर में कानूनी प्रणालियों का विश्वास बढ़ाना। उन्होंने सफल कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों को अपनी शुभकामनाएं दी।किसी भी देश की कानूनी बिरादरी उसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में वर्षों से, न्यायपालिका और बार देश में कानूनी व्यवस्था के संरक्षक रहे हैं। अभी कुछ समय पहले भारत ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाया और आजादी की इस लड़ाई में कानूनी पेशेवरों ने अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के संघर्ष में, कई वकीलों ने राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी कानूनी प्रैक्टिस छोड़ दी। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, हमारे संविधान के मुख्य वास्तुकार बाबा साहेब अम्बेडकर, देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और आजादी के समय कई अन्य महान हस्तियां खुद वकील थे चाहे वह लोकमान्य तिलक हों या वीर सावरकर। इसका मतलब यह है कि कानूनी पेशेवरों के अनुभव ने स्वतंत्र भारत की नींव को मजबूत किया और आज, जैसे-जैसे दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ रहा है, भारत की निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय व्यवस्था भी उस भरोसे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह बना है। एक दिन पहले ही देश की संसद ने लोकसभा और विधानसभाओं (राज्य विधानसभाओं) दोनों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का कानून पारित किया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक नई दिशा तय करेगा और भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास में नई ऊर्जा लाएगा।

यह सम्मलेन  ऐतिहासिक G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया ने भारतीय लोकतंत्र, जनसांख्यिकी तथा कूटनीति की झलक देखी। एक महीने पहले, भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इन उपलब्धियों से आत्मविश्वास से भरपूर, भारत 2047 तक एक विकसित देश के अपने लक्ष्य की दिशा में लगन से काम कर रहा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, भारत को निस्संदेह अपनी नींव के रूप में एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली की आवश्यकता है।  अंतर्राष्ट्रीय वकील सम्मेलन इस दिशा में भारत के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा साथ ही इस सम्मेलन के दौरान सभी देश एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकते हैं।

21वीं सदी में, हम गहराई से जुड़े हुए विश्व में रहते हैं। प्रत्येक कानूनी दिमाग या संस्था अपने अधिकार क्षेत्र के प्रति अत्यधिक सतर्क रहती है। हालांकि ऐसी कई ताकतें हैं जिनके खिलाफ अब भी  लड़ रहे हैं जिन्हें सीमाओं या अधिकार क्षेत्र की परवाह नहीं है। और जब खतरे वैश्विक हों तो उनसे निपटने का नजरिया भी वैश्विक होना चाहिए। चाहे वह साइबर आतंकवाद हो, मनी लॉन्ड्रिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो, या इसका दुरुपयोग हो, ऐसे कई मुद्दे हैं जहां सहयोग के लिए वैश्विक ढांचे की आवश्यकता होती है। यह महज किसी एक सरकार या प्रशासन का मामला नहीं है बल्कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए, विभिन्न देशों के कानूनी ढांचे को एक साथ आने की जरूरत है, जैसे हवाई यातायात नियंत्रण के लिए सहयोग करते हैं। कोई नहीं कहता, “तुम्हारे कानून तुम्हारे हैं, और मेरे कानून मेरे हैं, और मुझे इसकी परवाह नहीं है। उस स्थिति में, कोई भी विमान कहीं भी नहीं उतरेगा। हर कोई सामान्य नियमों और विनियमों, प्रोटोकॉल का पालन करता है। उसी तरह, हमें चाहिए विभिन्न क्षेत्रों में एक वैश्विक ढांचा स्थापित करने के लिए। अंतर्राष्ट्रीय वकीलों के सम्मेलन को निस्संदेह इस दिशा में गहराई से जाना चाहिए और दुनिया को एक नई दिशा देनी चाहिए।

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आपने डेटा प्रोटेक्शन कानून  उसमें सरलीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और उन परिभाषाओं से सामान्य व्यक्ति को सुविधा होगी।  यह देश की न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।’ मैंने एक बार सार्वजनिक रूप से न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ जी की सराहना की थी क्योंकि उन्होंने कहा था कि अब से, अदालत के फैसले का ऑपरेटिव हिस्सा वादी की भाषा में उपलब्ध कराया जाएगा। इस छोटे से कदम के लिए भी 75 साल लग गए और मुझे भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का कई स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए भी बधाई के पत्र है। इससे देश के आम लोगों को काफी मदद मिलेगी। अगर डॉक्टर अपने मरीज से उसकी भाषा में बात करे तो आधी बीमारी ठीक हो जाती है तथा यहां समान प्रगति करनी है।

टेक्नोलॉजी के माध्यम से कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम करना चाहिए। सुधार, और नई न्यायिक प्रथाएं। तकनीकी प्रगति ने न्यायपालिका प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं। वास्तव में, तकनीकी प्रगति ने व्यापार, निवेश और वाणिज्य क्षेत्रों को जबरदस्त बढ़ावा दिया है। इसलिए, कानूनी पेशे से जुड़े व्यक्तियों को भी इन तकनीकी सुधारों को अपनाना चाहिए। निसंदेह अंतर्राष्ट्रीय वकील सम्मेलन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दुनिया भर में कानूनी प्रणालियों का विश्वास बढ़ाना। उन्होंने सफल कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों को अपनी शुभकामनाएं दी।

Tags: Bharathttps://firstreportlive.in/misc/vsudhaiv-kutunbk…rjun-ram-meghval/5136/included in the International Lawyers Conference included Chief Justice of India DV Chandrachudsymbol of the spirit of Vasudhaiva KutumbkamUnion Law Minister and colleague Arjun Ram Meghwal.
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