Home » ऑडिट रिपोर्ट खुलासा: Commercial Tax Department की ढिलाई से करोड़ों के राजस्व का नुकसान !
ऑडिट रिपोर्ट 2022-23: GST और ई-वे बिल में बड़ा झोल, कमर्शियल टैक्स विभाग की ढिलाई से करोड़ों के राजस्व को चपत !
रांची न्यूज़ डेस्क: वित्त वर्ष 2022-23 के लिए जारी ऑडिट रिपोर्ट (रेवेन्यू) में कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट की एक बड़ी लापरवाही और सिस्टम की गंभीर खामियों का पर्दाफाश हुआ है। वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच किए गए परफॉर्मेंस ऑडिट में सामने आया है कि प्रॉपर वेरिफिकेशन न होने और ऑटोमेटेड सिस्टम की कमी के कारण राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा है।
1. ₹39.13 करोड़ के ई-वे बिल में धांधली: टैक्स और पेमेंट का वेरिफिकेशन ठप
ऑडिट जांच के दौरान GSTR-1 और ई-वे बिल (E-Way Bill) के बीच मिलान में एक बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है।
41 ई-वे बिल के मामले: ऑडिट में पाया गया कि ₹39.13 करोड़ के कुल 41 E-Way Bills के मामलों में टैक्सपेयर्स ने GSTR-1 में इनवॉइस-वाइज़ (Invoice-wise) पूरी जानकारी देने के बजाय केवल कुल जानकारी (Consolidated Data) दर्ज की।
नुकसान: विस्तृत इनवॉइस डेटा न होने के कारण टैक्स विभाग के लिए यह जांचना असंभव हो गया कि वास्तविक टैक्स रिपोर्टिंग हुई है या नहीं और सही पेमेंट जमा हुआ भी है या नहीं।
2. बकाएदारों की मौज: बिना टैक्स चुकाए ही मिल गया नया रजिस्ट्रेशन
ऑडिट रिपोर्ट में टैक्स पोर्टल और सिस्टम की सुरक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
सिस्टम की विफलता: वाणिज्यिक कर विभाग के पास ऐसा कोई ऑटोमेटेड सिस्टम मौजूद नहीं था, जो बकाया टैक्स देनदारी वाले PAN (Permanent Account Number) को ट्रैक कर सके या उस पर नया रजिस्ट्रेशन बनने से रोक सके।
परिणाम: जिन टैक्सपेयर्स पर ब्याज और पेनल्टी मिलाकर ₹5.02 लाख का बकाया था, उन्होंने पुराना बकाया चुकाए बिना ही उसी PAN कार्ड का उपयोग करके दोबारा नया GST रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways):
अवधि: परफॉर्मेंस ऑडिट (2018-19 से 2021-22)
मुख्य विसंगति: ₹39.13 करोड़ मूल्य के ई-वे बिलों का GSTR-1 से असंगत मिलान।
सिस्टम में चूक: ₹5.02 लाख के डिफ़ॉल्टरों को नया GST नंबर जारी होना।