🌾 अलनीनो के खतरे के बीच झारखंड की बड़ी मांग: कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्र से मांगा विशेष राहत पैकेज; उर्वरक कोटा बढ़ाने की अपील
रांची: देश में कमजोर मॉनसून और अलनीनो (El Niño) के बढ़ते खतरों के बीच झारखंड सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पैरवी शुरू कर दी है। मंगलवार को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा देश के सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय ऑनलाइन समीक्षा बैठक में झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए कंटीजेंसी प्लान (आपातकालीन योजना) का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया और सूखे व कम बारिश की मार झेल रहे जिलों के किसानों के लिए केंद्र सरकार से एक विशेष आर्थिक राहत पैकेज (Special Relief Package) जारी करने की पुरज़ोर मांग की।
📊 आईएमडी (IMD) की रिपोर्ट: देश में 40% कम बारिश, 248 जिलों में सूखा जैसे हालात
समीक्षा बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा प्रस्तुत आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं, जिसके आधार पर झारखंड ने केंद्र के सामने अपनी मांगें रखी हैं:
विवरण / मौसम संबंधी आंकड़े
अद्यतन स्थिति (1 जून से 17 जून 2026)
अनुमानित औसत राष्ट्रीय वर्षा
74 मिमी
वास्तविक दर्ज की गई वर्षा
मात्र 37 मिमी
देशभर में कुल वर्षा की कमी (Deficit)
लगभग 40 प्रतिशत
कम वर्षा वाले देश के कुल जिले
248 जिले
आगामी दो सप्ताह का पूर्वानुमान
सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना
🌽 झारखंड सरकार का कंटीजेंसी प्लान: मड़ुवा, मक्का और वैकल्पिक आजीविका पर ज़ोर
बैठक को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि झारखंड सरकार संभावित संकट को लेकर पहले से ही अलर्ट पर है:
मई में ही तैयारी: झारखंड सरकार ने संभावित अलनीनो प्रभाव को भांपते हुए मई माह में ही राज्यव्यापी कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया था। जिला एवं प्रखंड स्तर पर लगातार कृषि कार्यशालाएं चलाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
जलवायु-अनुकूल खेती: कम पानी में उगने वाली और बदलती जलवायु के अनुकूल फसलों जैसे मड़ुवा (रागी), मक्का एवं दलहनी फसलों को बढ़ावा देने की विशेष रणनीति अपनाई गई है।
सप्लीमेंट्री इनकम: किसानों की आय में स्थिरता बनाए रखने के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, लाह (Lac) उत्पादन, मत्स्य पालन और वनोपज आधारित स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
🧪 उर्वरक संकट पर भी घेरा: 70 हजार मीट्रिक टन खाद की कमी पर जताई चिंता
विशेष राहत पैकेज के साथ-साथ मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य में रासायनिक खादों और उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया:
झारखंड की कुल मांग: 3 लाख 90 हजार मीट्रिक टन उर्वरक।
केंद्र सरकार की वर्तमान सहमति: मात्र 3 लाख 20 हजार मीट्रिक टन।
मंत्री की अपील: उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि राज्य की जरूरत के मुताबिक शेष 70 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति भी समय रहते सुनिश्चित की जाए, ताकि मॉनसून की अनिश्चितता के बीच किसानों को खाद के लिए कतारों में न लगना पड़े और खेती के सीजन में कोई बाधा न आए।
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