Home » बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस और मिशनरी पर हमला,झारखंड में आदिवासियों के साथ हुआ छल, बदलती डेमोग्राफी पर सरकार चुप !
कांग्रेस ने आदिवासियों के साथ हमेशा किया छल, मिशनरियों ने निभाई सहयोगी की भूमिका: बाबूलाल मरांडी !
रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस, मिशनरियों और राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों के अधिकारों पर डाका डाला है और उन्हें गुमराह करने के लिए मिशनरियों का सहारा लिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासियों के संवैधानिक हक और अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर कोई खरोंच तक नहीं आने दी जाएगी।
ऐतिहासिक आंदोलनों को दबाने का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही अलग झारखंड राज्य की मांग उठने लगी थी, लेकिन कांग्रेस ने धूर्तता दिखाते हुए इसे नजरअंदाज किया। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन के आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा इन आंदोलनों को खरीदने और दबाने का काम किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की नीति हमेशा से ‘आदिवासी के नाम पर चिल्लाओ और उन्हें हाशिए पर धकेल दो’ की रही है।
मिशनरियों के जरिए राजनीति और दबाव का दावा
मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची के आर्च बिशप की ओर से आदिवासियों को रैलियों में शामिल होने के लिए पत्र जारी किए जाते हैं और न जाने पर जुर्माना लगाने की धमकी दी जाती है। उन्होंने एक ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासियों को भ्रमित करने में मिशनरियों की भूमिका असहनीय है और भाजपा इस प्रकार के राजनीतिक खेल को बर्दाश्त नहीं करेगी।
झारखंड की बदलती डेमोग्राफी पर जताई चिंता
प्रेस वार्ता के दौरान मरांडी ने राज्य, विशेषकर संथाल परगना में तेजी से बदल रही जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) पर आंकड़े प्रस्तुत करते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की:
आदिवासी आबादी: 1951 में आदिवासियों की जनसंख्या 35.38% थी, जो 2011 में घटकर 26.20% पर आ गई। मरांडी के अनुसार, यदि यही रफ्तार रही तो 2051 तक यह घटकर 22.21% रह जाएगी।
मुस्लिम आबादी: 1951 में यह 8.9% थी, जो 2011 में बढ़कर 14.53% हो गई और 2051 तक इसके 19% होने का अनुमान है।
सनातन आबादी: 1951 में 87.79% से घटकर 2011 में 81.17% रह गई है।
उन्होंने कहा कि संविधान में आदिवासियों और दलितों को आबादी के अनुपात में अधिकार मिलते हैं, ऐसे में घटती जनसंख्या उनके अस्तित्व के लिए महा भीषण संकट है।
बांग्लादेशी घुसपैठ और जमीनों पर अवैध कब्जे का मुद्दा
आदिवासी कल्याण समिति पाकुड़ के एक पत्र का संदर्भ देते हुए मरांडी ने आरोप लगाया कि संथाल परगना में फर्जी दानपत्रों के जरिए आदिवासियों की रैयती जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है। वहां बहुमंजिला इमारतें, मस्जिदें और मदरसें बनाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि बांग्लादेशियों द्वारा जमीन लूट की इन शिकायतों पर राज्य सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है ?इस प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी के साथ अशोक बड़ाइक, रामकुमार पाहन, सनी टोप्पो और पिंकी खोया भी उपस्थित रहे।