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JUVNL कर्मचारियों के GPF फंड पर उठे गंभीर सवाल, वर्षों से कटौती के बावजूद निकासी बंद: अजय राय ने CMD से मांगी उच्चस्तरीय जांच !
राँची : झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) एवं इसकी अनुषंगी कंपनियों—JBVNL, JUSNL एवं JUUNL—में पुरानी पेंशन योजना (OPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) को लेकर गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारियों के वेतन से हर महीने नियमित रूप से GPF की कटौती की जा रही है, उन्हें GPF नंबर भी आवंटित हैं और खाते में राशि भी प्रदर्शित होती है, लेकिन इसके बावजूद नियमों के तहत मिलने वाली अग्रिम (Advance) और पूर्ण निकासी (Withdrawal) की सुविधा ठप पड़ी है।
इस गंभीर विषय को लेकर झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने JUVNL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) को ई-मेल भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
“कटौती हो रही है तो आखिर पैसा कहाँ है?”
श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने निगम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों के वेतन से कटौती करने में तो कोई देरी नहीं होती, लेकिन जब कर्मचारी अपने ही जमा धन का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उन्हें नियमों का हवाला देकर टालमटोल किया जाता है।
अजय राय ने JUVNL प्रबंधन से 7 प्रमुख सवाल पूछे हैं:
फंड की स्थिति: कर्मचारियों से काटी गई GPF की राशि वर्तमान में किस खाते या कोष में रखी गई है?
संचालन व्यवस्था: यदि GPF Trust का गठन नहीं हुआ है, तो इस संचित निधि का संचालन कौन कर रहा है?
ब्याज और लेखांकन: कर्मचारियों के GPF खाते का लेखांकन (Accounting) कौन कर रहा है और ब्याज का निर्धारण किस प्रक्रिया से हो रहा है?
निवेश के नियम: क्या इस राशि को कहीं निवेश किया जा रहा है? यदि हाँ, तो किस नियम और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से?
गठन में देरी: GPF Trust के गठन में इतने वर्षों का विलंब क्यों हुआ?
अधिकारियों की जवाबदेही: ट्रस्ट गठन में देरी और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सुविधा से वंचित क्यों: पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार GPF अग्रिम और निकासी से क्यों रोका जा रहा है?
गाढ़ी कमाई के हिसाब में पारदर्शिता की मांग
अजय राय ने कहा कि गृह निर्माण, बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी-विवाह और चिकित्सीय आपातस्थिति में कर्मचारी अपनी जीवनभर की बचत (GPF) पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे समय में अपने ही पैसे के लिए कर्मचारियों को परेशान करना उनके साथ सीधा अन्याय है।
उन्होंने मांग की कि JUVNL प्रबंधन GPF राशि के एक-एक रुपये का हिसाब सार्वजनिक करे। कर्मचारियों की मेहनत की कमाई के मामले में किसी भी तरह की अस्पष्टता या गोपनीयता स्वीकार नहीं की जाएगी।
श्रमिक संघ की मुख्य मांगें
अजय राय ने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा न ली जाए और निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत कार्रवाई की जाए:
उच्चस्तरीय जांच: GPF अंशदान और पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
GPF Trust का गठन: ट्रस्ट के गठन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट कर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
अंतरिम व्यवस्था: जब तक Trust का विधिवत गठन नहीं होता, तब तक अंतरिम व्यवस्था बनाकर कर्मचारियों को अग्रिम व निकासी की सुविधा दी जाए।
पारदर्शी लेखांकन: वर्षों से काटी गई पूरी राशि का पारदर्शी ब्योरा कर्मचारियों के सामने रखा जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: वित्तीय लापरवाही या नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर नियमानुसार कार्रवाई हो।