रांची के लोक भवन में गूंजी ‘विविधता में एकता’ की गूंज: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मनाया पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस, बताया ज्ञान-सृजन की भूमि
झारखंड और बंगाल के संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक भी; उद्योगों से लेकर सामाजिक जीवन तक बंगाली समाज का योगदान अतुलनीय
रांची: राजधानी रांची स्थित लोक भवन (राजभवन) में शनिवार को पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस बेहद गरिमामयी और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस खास अवसर पर झारखंड के माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने राज्य में रह रहे पश्चिम बंगाल के नागरिकों और बंगाली समुदाय के प्रबुद्ध लोगों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” पहल ने देश के अलग-अलग राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी समझ और भावनात्मक एकता की कड़ियों को और ज्यादा मजबूत करने का काम किया है।
📊 पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह 2026: मुख्य बातें
लोक भवन में आयोजित इस गरिमामयी उत्सव के मुख्य बिंदुओं और वक्ताओं के बयानों को नीचे दी गई तालिका में संक्षेप में समझा जा सकता है:
फोकस क्षेत्र / विषय |
राज्यपाल एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रेखांकित मुख्य बातें (Key Highlights) |
|---|---|
ऐतिहासिक संदर्भ |
20 जून 1947 को पश्चिम बंगाल राज्य का ऐतिहासिक निर्माण हुआ था, जिसकी याद में यह उत्सव मनाया गया। |
सांस्कृतिक धरोहर |
भारत को राष्ट्रगान (जन गण मन) और राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) देने का गौरव बंगाल की पावन भूमि को ही जाता है। |
झारखंड-बंगाल कनेक्शन |
दोनों राज्यों के बीच केवल भौगोलिक निकटता नहीं है, बल्कि दोनों की आत्मा सांस्कृतिक व सामाजिक रूप से जुड़ी है। |
उत्सवधर्मी संस्कृति |
दुर्गा पूजा, काली पूजा और बांग्ला पाक-परंपरा (व्यंजनों की मिठास) सामाजिक समरसता और सामूहिकता का जीवंत प्रतीक हैं। |
वैश्विक पहचान |
महान फिल्मकार सत्यजीत रे ने भारतीय सिनेमा को और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय साहित्य को विश्व पटल पर स्थापित किया। |
⚡ “बंगाल की धरती ज्ञान, सामाजिक पुनर्जागरण और क्रांति की भूमि” – राज्यपाल
समारोह को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने बंगाल की बौद्धिक विरासत को नमन करते हुए कहा:
“बंगाल की धरती सदैव से ज्ञान, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना की जननी रही है। देश के सामाजिक पुनर्जागरण (Social Renaissance) से लेकर स्वतंत्रता संग्राम की वेदी तक, बंगाल के महापुरुषों और क्रांतिकारियों ने राष्ट्र निर्माण में अपना ऐतिहासिक व अविस्मरणीय योगदान दिया है। आज झारखंड के विकास में, चाहे वह शिक्षा हो, संस्कृति हो, उद्योग हो या व्यापार—यहाँ निवासरत बंगाली समाज का उल्लेखनीय योगदान सराहनीय है। मैं स्थापना दिवस पर सभी नागरिकों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करता हूँ।”
🎵 “राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत बंगाल की देन, आत्मीय हैं हमारे संबंध” — डॉ. नितिन कुलकर्णी
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सभी को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच एक बेहद गहरा आत्मीय संबंध है। बंगाल की उत्सवधर्मी संस्कृति झारखंड में भी रची-बसी है, जहाँ दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे त्योहार पूरे सामाजिक समरसता के साथ मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम जहां भी रहें, अपने राज्य और राष्ट्र के विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहें।
🚀 औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में भी अग्रणी है बंगाल
राज्यपाल ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल ने कृषि, उद्योग, विज्ञान, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में भी देश के भीतर अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत को आर्थिक और तकनीकी रूप से महाशक्ति बनाने में बंगाल के युवाओं और वहां के उद्योग जगत का योगदान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है और भविष्य में भी देश के विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाने में इसकी हिस्सेदारी अतुलनीय रहेगी।




















