Home » झारखंड: फर्जी खतियान और वंशावली से बने विदेशी नागरिक तो कटेगा नाम, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी K. Ravi Kumar के सख्त निर्देश
मतदाता सूची में उम्र की तार्किक विसंगतियों की सुनवाई नियमानुसार सुनिश्चित कराएं: CEO K. Ravi Kumar !
रांची: झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) श्री के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में उम्र और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी तार्किक विसंगतियों (Logical Anomalies) के मामलों का निपटारा पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और सावधानी के साथ करें।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया का उद्देश्य किसी पात्र भारतीय नागरिक को परेशान करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है।
फर्जी दस्तावेज़ और विदेशी नागरिकों के प्रयासों पर पैनी नजर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ विदेशी नागरिक, भारतीय नागरिकों के खतियान या वंशावली में छेड़छाड़ कर खुद को किसी परिवार का वंशज दर्शाते हुए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का प्रयास कर रहे हैं।
ERO को सूचना दें: यदि किसी मतदाता या स्थानीय नागरिक के संज्ञान में ऐसा मामला आता है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) को दें।
मददगारों पर भी होगी कार्रवाई: यदि खतियान धारक या परिवार का कोई सदस्य किसी विदेशी या अपात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए गलत दस्तावेज या बयान प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ भी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा अन्य विधिक प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उम्र और जन्मतिथि की विसंगतियों के निष्पादन हेतु मुख्य दिशा-निर्देश
समेकित परीक्षण: उम्र से जुड़ी विसंगतियों की जांच सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित न रहे। एक ही माता-पिता की पंजीकृत संतानों, उनके माता-पिता की आयु और जन्म से जुड़े अभिलेखों का एक साथ मिलान (Cross-verification) किया जाए।
महिला मतदाताओं का सत्यापन: यदि महिला मतदाता के संबंध में वंशावली या पारिवारिक संबंध की जांच आवश्यक हो, तो उनके पैतृक परिवार और वंश की जानकारी भी निष्पक्षता से प्राप्त की जाए।
सरकारी योजनाओं के लिए उम्र में फेरबदल: कई मामलों में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्र या जन्मतिथि में बदलाव की बात सामने आई है। ERO केवल एक दस्तावेज के आधार पर फैसला न लें, बल्कि पूर्व के सभी रिकॉर्ड का मिलान करें।
कारणयुक्त आदेश (Speaking Order): असंगति पाए जाने पर मतदाता को पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। इसके बाद ही तथ्यों के आधार पर ‘कारणयुक्त आदेश’ (Speaking Order) पारित कर सूची में सुधार किया जाए।
परमानेंट डॉक्यूमेंट के रूप में संरक्षित होंगे अभिलेख
श्री के. रवि कुमार ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत तैयार की जा रही मतदाता सूची और संबंधित दस्तावेज स्थायी अभिलेख (Permanent Documents) के रूप में संरक्षित किए जाएंगे। इसलिए दस्तावेजों और विवरणों की शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि “एक भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं छूटेगा और किसी भी अपात्र या विदेशी नागरिक का नाम इसमें शामिल नहीं होने दिया जाएगा।”