Home » MMDR एक्ट पर कांग्रेस का विरोध केवल अवैध कमाई बंद होने की बेचैनी: भाजपा प्रवक्ता अशोक बड़ाईक
MMDR संशोधन पर कांग्रेस का विरोध जनता के लिए नहीं, अवैध खनन बंद होने की बेचैनी: अशोक बड़ाईक !
मुख्य बिंदु (Highlights):
1. केंद्र का स्पष्टीकरण: खनिज राजस्व का 90% हिस्सा सीधे राज्यों को ही प्राप्त होता है।
2. कांग्रेस पर प्रहार: 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का आंकड़ा पूरी तरह काल्पनिक और भ्रामक।
3. अवैध खनन पर चुप्पी: धनबाद, चतरा और हजारीबाग में वर्षों से चल रहे अवैध कोयला सिंडिकेट पर कांग्रेस ने नहीं की कार्रवाई।
4. छात्रों के मुद्दे पर घेरा: JPSC-JSSC धांधली में CBI जांच की मांग पर चुप्पी साधने वाली कांग्रेस को नैतिक अधिकार नहीं।
रांची:
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय द्वारा खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम (MMDR Act) को लेकर लगाए गए आरोपों पर करारा पलटवार किया है। श्री बड़ाईक ने कहा कि कांग्रेस नेता द्वारा पूछे गए 10 सवालों में तथ्यों का अभाव है और यह जनता के बीच राजनीतिक भ्रम फैलाने का एक प्रयास मात्र है।
खनिज राजस्व का 90% हिस्सा राज्यों के पास सुरक्षित
भाजपा प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने कहा कि MMDR संशोधन अधिनियम किसी एक राज्य विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक सुदृढ़ता लाने के लिए बनाया गया है।
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “केंद्र सरकार के स्तर से यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि खनिज क्षेत्र से प्राप्त होने वाले कुल राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा संबंधित राज्यों को ही मिलता है। ऐसे में कांग्रेस का यह दुष्प्रचार पूरी तरह से भ्रामक है कि केंद्र सरकार झारखंड का हक छीन रही है।”
14,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा काल्पनिक और गैर-जिम्मेदाराना
कांग्रेस द्वारा बार-बार 14,000 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का उल्लेख किए जाने पर भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस आंकड़े का वैधानिक और कानूनी आधार क्या है? केवल एक बड़ा आंकड़ा बोल देने से वह संवैधानिक या सुनिश्चित राजस्व नहीं बन जाता।
अशोक बड़ाईक ने कहा कि कांग्रेस को यह भी हिसाब देना चाहिए कि खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से कितना किया गया? जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के बावजूद खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और पुनर्वास की स्थिति दयनीय क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भ्रम फैला रही है कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का हवाला देने पर श्री बड़ाईक ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए ही कानून में समान व्यवस्था और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित की है। यह संघीय ढांचे पर हमला नहीं है। यदि कांग्रेस को लगता है कि यह कानून असंवैधानिक है, तो उसे सड़क पर राजनीतिक नौटंकी करने के बजाय संसद और न्यायपालिका के समक्ष तथ्य रखने चाहिए।
“भाजपा के सांसद झारखंड के साथ भी हैं और देश के साथ भी। हमारी राजनीति क्षेत्रीय स्वार्थों पर नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और राज्यहित के संतुलन पर आधारित है।”
— अशोक बड़ाईक, प्रदेश प्रवक्ता (BJP)
अवैध खनन और सिंडिकेट बचाने की छटपटाहट
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस और झामुमो सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि धनबाद, चतरा, हजारीबाग और अन्य क्षेत्रों में वर्षों से चल रहे अवैध कोयला कारोबार पर कार्रवाई होते ही विपक्षी दल बेचैन हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कोयले पर सेस (Cess) और उपकर में भारी वृद्धि की गई है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ रही है और रोजगार के अवसरों पर विपरीत असर पड़ रहा है। कांग्रेस एक तरफ केंद्र से राजस्व की चिंता का नाटक करती है, तो दूसरी तरफ राज्य में ऐसा कर ढांचा बनाती है जिससे स्थानीय उद्योगों का नुकसान हो।
छात्रों के भविष्य पर चुप, खनिज पर सियासत
अशोक बड़ाईक ने कांग्रेस को युवाओं के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि जब झारखंड के हजारों छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ सड़कों पर थे और भाजपा CBI जांच की मांग कर रही थी, तब कांग्रेस और झामुमो ने उस आंदोलन को दबाने का काम किया।
उन्होंने अंत में कहा कि झारखंड की खनिज संपदा राज्य की जनता की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है। भाजपा कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर MMDR कानून की सच्चाई, राज्य के वास्तविक राजस्व और कांग्रेस-झामुमो के कारनामों का पर्दाफाश करेंगे। अब फैसला प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि जनता की अदालत में होगा।