Home » झारखंड की 9 जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं पर बड़ा राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव 4 जुलाई को, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की का एलान
झारखंड में पहली बार एक मंच पर दिखेंगी सभी 9 जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं, 4 जुलाई को रांची में ऐतिहासिक राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव
रांची: झारखंड की समृद्ध भाषाई संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने रांची स्थित अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता कर आगामी 4 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में एक भव्य राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव (State-Level Conclave) आयोजित करने की घोषणा की है।
राज्य गठन के बाद यह पहला मौका होगा जब झारखंड की सभी नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा।
26 वर्षों की उदासीनता होगी दूर, नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने का संकल्प
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य गठन के 26 वर्षों के बाद भी इन भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और शिक्षा के क्षेत्र में जो अपेक्षित कार्य होने चाहिए थे, वे नहीं हो सके। इसी का नतीजा है कि आज की नई पीढ़ी अपनी ही मातृभाषाओं से लगातार दूर होती जा रही है।
“यह आयोजन मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और उसकी मातृभाषाओं को बचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगा।” — बंधु तिर्की, पूर्व मंत्री
एक मंच पर एक साथ गूंजेंगी ये 9 भाषाएं:
इस राज्यस्तरीय महा-मंथन में झारखंड की निम्नलिखित सभी 9 मान्यता प्राप्त भाषाओं के विशेषज्ञ शामिल होंगे:
जनजातीय भाषाएं: संथाली, मुंडारी, हो, कुरुख, और खड़िया।
क्षेत्रीय भाषाएं: नागपुरी, पंचपरगानिया, खोरठा, और कुरमाली।
कॉन्क्लेव में जुटेंगे 2,500 से अधिक दिग्गज
इस ऐतिहासिक समागम को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। बंधु तिर्की ने बताया कि इस कॉन्क्लेव में राज्यभर से लगभग 2,500 छात्र-छात्राएं, शोधार्थी (Researchers), विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर और नामचीन भाषाविद शामिल होंगे। इस दौरान भाषाओं के भविष्य, उनकी शिक्षा प्रणाली में भागीदारी और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
झारखंड की कला-संस्कृति और राजनीतिक हलचल से जुड़े वीडियो देखने के लिए आप Bandhu Tirkey Press Conference Ranchi देख सकते हैं, जो रांची में आयोजित उनके राजनीतिक और सामाजिक संवादों को दर्शाता है।