Home » केंद्र ने देश के एजुकेशन सिस्टम को ‘रिजेक्शन सिस्टम’ बना दिया: गुवाहाटी में बरसीं झारखंड की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की
गुवाहाटी/रांची :: “हमारे देश में माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए खेत बेच देते हैं, गहने गिरवी रख देते हैं। लेकिन जब पेपर लीक होते हैं और परीक्षाएं रद्द होती हैं, तो सिर्फ परीक्षा नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के सपने टूटते हैं। केंद्र सरकार ने भारत के एजुकेशन सिस्टम को रिजेक्शन सिस्टम बना दिया है।”
यह तीखा हमला झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने आज गुवाहाटी में मीडिया से संवाद करते हुए केंद्र सरकार पर बोला।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस द्वारा देशभर में चलाए जा रहे “छात्रों की गूंज” अभियान के तहत वे असम के गुवाहाटी में मीडिया को संबोधित कर रही थीं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेतृत्व ने देश के 28 शहरों में 28 नेताओं को इस राष्ट्रीय अभियान के तहत जिम्मेदारी सौंपी है, जिसमें झारखंड से शिल्पी नेहा तिर्की को गुवाहाटी भेजा गया है।
“कोटा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों की खुदकुशी केवल आंकड़े नहीं हैं। ये बिखरे हुए परिवारों, टूटे हुए सपनों और युवाओं के भविष्य की दर्दनाक कहानियां हैं।”
— शिल्पी नेहा तिर्की, मंत्री (झारखंड सरकार)
शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्र सरकार से पूछे 3 सीधे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने देश के युवाओं और अभिभावकों की तरफ से केंद्र सरकार के सामने तीन गंभीर सवाल रखे:
क्या युवाओं की मेहनत की कोई कीमत नहीं है?
क्या रात-दिन एक करने वाले माता-पिता के त्याग और बलिदान का कोई मूल्य नहीं है?
आखिर कब तक छात्रों का भविष्य पेपर लीक माफियाओं और भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ता रहेगा?
🚨 केंद्र सरकार के सामने रखीं 3 प्रमुख मांगें
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने साफ कहा कि केवल कुछ मोहरों की गिरफ्तारी करके सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने केंद्र के सामने निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखीं:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: देश में बार-बार हो रही परीक्षा संबंधी विफलताओं और पेपर लीक की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अविलम्ब अपने पद से इस्तीफ़ा दें।
कठोर कानूनी कार्रवाई: पेपर लीक, भर्ती घोटालों और परीक्षा संबंधी भ्रष्टाचार में शामिल बड़ी मछलियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
सिस्टम में सुधार: राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली (National Examination System) को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाया जाए।
उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि यह लड़ाई केवल परीक्षाओं की नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण की है। देश का युवा अब चुप नहीं बैठेगा, उसे हर हाल में न्याय मिलना चाहिए।