Home » रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे पर सरयू राय का बड़ा खुलासा, लगे गंभीर आरोप
रिम्स निदेशक के इस्तीफे पर सरयू राय का बड़ा खुलासा: ‘100 करोड़ के बिल भुगतान’ का पूरा सच
रांची/जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) के निदेशक डॉ. राजकुमार के अचानक इस्तीफे को लेकर एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज राजनीतिक खुलासा किया है। सरयू राय के अनुसार, डॉ. राजकुमार की रिम्स निदेशक पद से अपमानजनक विदाई का असली कारण कोई निजी वजह नहीं, बल्कि मेडॉल (Medall) और हेल्थ मैप (Health Map) नामक प्राइवेट जांच संस्थाओं के बकाया भुगतान से जुड़ा सरकारी दबाव है।
“नियम-कानून को ताक पर रखकर झारखंड सरकार रिम्स जैसी स्वायत्तशासी (Autonomous) संस्था को अपनी मनमर्जी से चलाना चाहती है और इसे लूट का अड्डा बना दिया गया है।” — सरयू राय, विधायक
🚨 मुख्य बिंदु: सरयू राय के बड़े आरोप
100 करोड़ का बिल: मेडॉल और हेल्थ मैप ने विभिन्न जांचों के नाम पर कुल ₹100 करोड़ का बिल पेश किया था, जिसे फर्जी मानकर पूर्व निदेशकों ने रोक दिया था।
दबाव में विदाई: डॉ. कामेश्वर प्रसाद के बाद अब डॉ. राजकुमार को भी इसी ₹53 करोड़ की कथित देनदारी और सरकारी दबाव के कारण पद छोड़ना पड़ा।
रिम्स का बकाया: उल्टा रिम्स का ही इन दोनों कंपनियों पर संसाधनों के इस्तेमाल के एवज में करीब ₹38 करोड़ रुपया बकाया है।
बिना बैठक के हस्ताक्षर: डॉ. राजकुमार को हटाने के लिए शासी निकाय (Governing Body) की औपचारिक बैठक किए बिना ही, सदस्यों के हस्ताक्षर बाहर से ही करा लिए गए।
🔍 क्या है पूरा विवाद? (क्रोनोलॉजी समझें)
रिम्स के निदेशकों और स्वास्थ्य विभाग के बीच का यह विवाद नया नहीं है। सरयू राय के अनुसार, यह पूरा खेल पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कार्यकाल में शुरू हुआ था।
🔍 क्या है पूरा विवाद? (क्रोनोलॉजी समझें)
रिम्स के निदेशकों और स्वास्थ्य विभाग के बीच का यह विवाद नया नहीं है। सरयू राय के अनुसार, यह पूरा खेल पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कार्यकाल में शुरू हुआ था।
अधिकारी/निदेशकक्या हुआ उनके साथ?
डॉ. डी.के. सिंहतत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री से मतभेद के कारण पद छोड़ना पड़ा।
डॉ. कामेश्वर प्रसादउन्होंने ₹100 करोड़ के बिल को “आधे से अधिक फर्जीवाड़ा” बताकर भुगतान से इनकार किया, जिसके बाद उन्हें रिम्स छोड़ना पड़ा।
डॉ. राजकुमार (वर्तमान)स्वास्थ्य विभाग ने इन कंपनियों के बिल भुगतान का दबाव बनाया। उन्होंने लिखित आदेश और फंड की मांग की, जिसे खारिज कर उन्हें इस्तीफे पर मजबूर किया गया।
डॉ. राजकुमार के इनकार का आधार क्या था?
डॉ. राजकुमार का रुख स्पष्ट था कि मेडॉल और हेल्थ मैप को झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने बहाल किया था, न कि रिम्स ने। इसलिए:
इसका भुगतान सीधे स्वास्थ्य विभाग अपने बजट से करे।
या फिर स्वास्थ्य विभाग इसके लिए लिखित आदेश जारी करे और उतनी धनराशि रिम्स को ट्रांसफर करे।
परंतु, विभाग के अधिकारी लिखित जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे और चाहते थे कि निदेशक बिना किसी आनाकानी के चुपचाप भुगतान की फाइलों पर साइन कर दें।
⚖️ कोर्ट की शरण और ‘हस्ताक्षर’ वाली साजिश
सरयू राय ने खुलासा किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुचित कार्य करने के लिए डॉ. राजकुमार पर इस कदर दबाव बनाया जा रहा था कि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान तीन बार झारखंड उच्च न्यायालय (High Court) का संरक्षण लेना पड़ा।
इतना ही नहीं, रिम्स नियमावली 2002 की धारा-12 को धत्ता बताते हुए, बिना शासी परिषद की बैठक आयोजित किए, बाहर से ही सदस्यों के हस्ताक्षर करवाकर निदेशक को हटाने की साजिश रची गई।
📢 मुख्यमंत्री से सीआईडी (CID) जांच की मांग
विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है:
तीन निदेशकों की विदाई की जांच: डॉ. डी.के. सिंह, डॉ. कामेश्वर प्रसाद और डॉ. राजकुमार को असम्मानजनक तरीके से रिम्स छोड़ने के लिए विवश करने की घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच हो।
पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की भूमिका: इस पूरे कथित घोटाले और नियुक्तियों में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और निहित स्वार्थी तत्वों की भूमिका की गहन जांच हो।
सीआईडी एक्शन: सीआईडी (CID) को इन पैथोलॉजिकल जांच एजेंसियों के फर्जी बिलों का भुगतान रिम्स से कराने के षड्यंत्र की जांच के लिए तत्कालीन मंत्रियों और अधिकारियों के ठिकानों तक पहुंचना चाहिए।