Home » सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने युवाओं को दिया बड़ा संदेश !
सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका का दीक्षांत समारोह: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने युवाओं से समाज के वंचित वर्ग को शिक्षा से जोड़ने का किया आह्वान
दुमका: राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री संतोष कुमार गंगवार ने आज दुमका के कन्वेंशन सेंटर में सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में कम-से-कम एक ऐसे व्यक्ति को शिक्षा से जरूर जोड़ें, जिसे सामाजिक-आर्थिक कारणों से पढ़ने-लिखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि किसी बच्चे को विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करना, जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में सहयोग देना या किसी व्यक्ति को साक्षर बनाना भी समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। ज्ञान का वास्तविक विस्तार तभी होता है जब उसे दूसरों के साथ साझा किया जाए।
शिक्षा को जीवन की नई शुरुआत बनाएं युवा
विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह सफलता वर्षों के कड़े परिश्रम, शिक्षकों के मार्गदर्शन और माता-पिता के त्याग का परिणाम है। उन्होंने सलाह दी कि इस उपाधि को जीवन की अंतिम मंजिल न मानकर एक नई शुरुआत के रूप में देखें। शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल एक सफल पेशेवर बनना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। जीवन में सफलता को सार्थक बनाने के लिए ईमानदारी, अनुशासन और समाज के प्रति संवेदनशीलता बहुत जरूरी है।
शैक्षणिक व्यवस्था और समयबद्धता पर विशेष जोर
कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि हर नीति और निर्णय के केंद्र में केवल छात्रहित होना चाहिए। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया:
गुणवत्तापूर्ण शिक्षण: नियमित कक्षाएं, पुस्तकालयों और प्रयोगशालाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
समयबद्ध अकादमिक कैलेंडर: सत्रों का नियमित संचालन, समय पर परीक्षाएं और तय सीमा के भीतर परिणामों का प्रकाशन अनिवार्य हो ताकि विद्यार्थियों के भविष्य और रोजगार की योजना पर असर न पड़े।
पारदर्शिता और जवाबदेही: परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए।
झारखंड के वीर सपूतों और संस्कृति से प्रेरणा
राज्यपाल ने कहा कि सिदो कान्हु विश्वविद्यालय झारखंड के महान वीर सपूतों सिदो और कान्हु के नाम पर स्थापित है। वर्ष 1855-56 का संथाल हूल अन्याय के विरुद्ध साहस और स्वाभिमान का ऐतिहासिक प्रतीक है। उन्होंने संताल परगना की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकज्ञान और परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिक विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की बात कही। विश्वविद्यालय में कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण विकास से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
‘विकसित भारत@2047’ और युवाओं की भूमिका
देश के विकास का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘विकसित भारत@2047’ का लक्ष्य सामने है और इसमें युवाओं की भूमिका अहम है। ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल नौकरी ढूंढने वाले न बनें, बल्कि अपनी उद्यमशीलता से नए रोजगार के अवसर भी पैदा करें।
समारोह के अंत में राज्यपाल ने सभी को आगामी दीपावली एवं छठ महापर्व की आत्मीय शुभकामनाएं दीं। इस गरिमामयी अवसर पर झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष श्री रविंद्र नाथ महतो भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।